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बुखार से तीन की मौत, 50 बीमार

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गोंदलामऊ ब्लॉक के आधा दर्जन गांवों में फैला बुखार का प्रकोप
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औरंगाबाद (सीतापुर)। गोंदलामऊ विकासखंड में बुखार का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को तीन लोगों की मौत हो गई। ये लोग कई दिनों से बुखार से पीड़ित थे। इनका इलाज प्राइवेट चिकित्सालय में चल रहा था। इधर, स्वास्थ्य विभाग इन मौतों को बुखार से नहीं बल्कि अन्य कारणों से होने की बात कह रहा है।

औरंगाबाद इलाके में बुखार का प्रकोप दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। रोजाना नए-नए गांवों में बुखार फैल रहा है। नगवा जयराम की मोहनी (80) कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी। इनका इलाज प्राइवेट चिकित्सालय में चल रहा था। शुक्रवार को इनकी मौत हो गई।
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कैमहरा निवासी मेघा (62) पिछले पांच दिन से तेज बुखार से बहुत परेशान थीं। परिवारीजनों ने पहले इन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद इनकी तबियत ठीक हो गई थी। डिस्चार्ज होने के बाद यह घर चली गई। शुक्रवार को अचानक फिर से इनकी तबियत बिगड़ी। परिवारीजन अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे।

इसी दौरान इनकी भी मौत हो गई। गोमिदापुर निवासी रामलाल (50) बुखार से ग्रसित चल रहे थे। यह प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे थे। इन्होंने सीएचसी से इलाज नहीं कराया था। इनकी भी इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके अलावा गोमिदापुर में 50 से अधिक लोग तेज बुखार से पीड़ित है। इन घटनाओं के बाद भी शुक्रवार को टीम गांव नहीं पहुंची। इससे लोगों के अंदर स्वास्थ्य विभाग के प्रति गुस्सा व्याप्त है।

दूसरी थी बीमारियां
तीनों मरीज की काफी उम्र थी। यह दूसरी तमाम बीमारियों से परेशान चल रहे थे। इसी वजह से इनकी मौत हुई है।
-डॉ. धीरज मिश्र, सीएचसी अधीक्षक, गोंदलामऊ

महीने भर में हो चुकी हैं 19 मौतें
गोंदलामऊ विकासखंड में पिछले एक माह के दौरान 19 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों के परिवारीजन इन सभी की मौत बुखार से होने की बात कह रहे है लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन मौतों को बुखार से नहीं बल्कि अन्य बीमारियों से होने की बात कह रहा है।

ऐसे में ग्रामीण भी समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर यह कौन सी बीमारी है जो पकड़ में नहीं आ रही है। हालांकि अब तक जितनी भी मौतें हुई है उनमें किसी का भी पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया है। जिससे मौत का कारण स्पष्ट हो सकें।

जिला अस्पताल में भी बुखार के मरीज बढ़े
वायरल फीवर के चलते जिला अस्पताल में भी मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। ओपीडी में रोजाना तीन हजार मरीज आते थे। लेकिन इस समय यह आंकड़ा बढ़कर 3500 के आसपास पहुंच गया है। सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल का कहना है कि सितंबर माह का मौसम सेहत के लिए बहुत नाजुक होता है।
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कारण यह है कि इस महीने में उमस व बरसात व तेज धूप एक साथ दिन में मौसम बदलने से वायरल बढ़ जाता है। इसी वजह से ओपीडी में अधिकतर मरीज वायरल फीवर, उल्टी दस्त के अधिक आ रहे हैं।
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