प्रकाश पर्व दिवाली के दौरान लापरवाही भरी आतिशबाजी की घटनाओं में जख्मी लोगों के इलाज के लिए स्वास्थ्य महकमा कतई तैयार नहीं है।
यहां के बर्न यूनिट में बारह बेड हैं, मगर इनकी सूरत बदरंग हैं। कारण यह है कि बेड पर पड़े गद्दे फटेहाल हैं। यही नहीं स्टॉफ नर्स का भी टोटा है।
स्टॉफ की कमी से एक नर्स को कई वार्डों में ड्यूटी निभानी पड़ती हैं, हालांकि स्वास्थ्य विभाग जोखिम भरी घटनाओं से निपटने के लिए जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के तैयार होने का दावा कर रहा है।
मंगलवार की दोपहर बर्न वार्ड में एक बेड पर शहर के मोहल्ला पशु चिकित्सालय परिसर निवासी रानी देवी व दूसरे बेड पर पुलिस लाइन निवासी चांदनी देवी पड़ी कराह रही थीं।
परिवार के सदस्य करीब ही बैठे उन्हें दिलासा दे रहे थे। स्टॉफ नर्स रूम में ताला झूल रहा था। जबकि अन्य करीब 12 बेड खाली पड़े हुए थे। बेडों की हालत भी दयनीय थी, बेड शीट फटेहाल थी।
वहीं साफ-सफाई का भी टोटा नजर आ रहा था। कैमरा देखते ही वहां मौजूद मरीजों के तीमारदार बोले कि बड़ी अव्यवस्था है। मरीजों की हालत बिगड़े तो भागकर इमरजेंसी जाना पड़ता है। यहां पर कोई हाल लेने वाला नहीं है।
अस्पताल प्रशासन अतिशबाजी से घायल होने वाले मरीजों को तत्काल इलाज देने की व्यवस्था दुरुस्त होने की बात कह रहा है। जिसमें 12 बेड मरीजों के लिए तैयार होने की भी बात कही जा रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के दावों से हकीकत कुछ अलग ही नजर आ रही है।