रेस्क्यू में देरी पड़ी भारी, घायल तेंदुए की चित्रकूट ले जाते समय रास्ते में हुई मौत
सीतापुर। वन विभाग की लापरवाही का खामियाजा आखिरकार तेंदुए को अपनी जान से हाथ धोकर चुकाना पड़ा। सरदपुर के एक कुएं में गिरा तेंदुआ 40 घंटे बाद जिंदगी की जंग हार गया। वन विभाग की टीम तेंदुआ को लेकर चित्रकूट के जंगल में छोड़ने के लिए ले जा रही थी। रास्ते में तेंदुए ने दम तोड़ दिया।
मालूम हो, कि सदरपुर थाना क्षेत्र के खफा कला गांव में बीते रविवार को शाम 7 बजे एक तेंदुआ शिकार की तलाश में पहुंचा था। अंधेरे में हलचल का अहसास होने पर एक ग्रामीण ने टॉर्च लगाई। टॉर्च की रोशनी पड़ते ही हड़बड़ा कर तेंदुआ कुएं में गिर गया था।
वन विभाग ने लखनऊ चिड़ियाघर के विशेषज्ञों की टीम से तेंदुए को निकालने के लिए मदद मांगीं थी। लखनऊ चिड़ियाघर के विशेषज्ञों की टीम ने लापरवाही के सारी हदें पार करते हुए डेढ़ घंटे का सफर पूरा करने में 16 घंटे लगा दिए। विशेषज्ञों की टीम सोमवार की दोपहर 2:30 बजे गांव पहुंची। इ
सके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। करीब पांच घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सोमवार की शाम 8 बजे ट्रैंकुलाइज कर तेंदुए को 25 घंटे बाद कुएं से बाहर निकाला जा सका। इसके बाद घायल तेंदुए को महमूदाबाद रेंजर ऑफिस ले जाकर इलाज किया गया।
मंगलवार की सुबह पीसीसीएफ से मंजूरी मिलने के बाद वन विभाग की टीम उसे लेकर चित्रकूट के जंगल में छोड़ने के लिए रवाना हुई। रास्ते में फतेहपुर के बिंदकी के पास तेंदुए की मौत हो गई। डीएफओ अनिरुद्ध पांडेय ने बताया कि तेंदुआ चित्रकूट के जंगल में छोड़ने के लिए ले जाया जा रहा था। रास्ते में उसने दम तोड़ दिया है।