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बाढ़ प्रभावित इलाके में पैर पसारने लगे संक्रामक रोग

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रेउसा क्षेत्र में 40 से ज्यादा ग्रामीण मलेरिया से पीड़ित, तंबौर में भी संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका
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रेउसा/तंबौर (सीतापुर)। घाघरा नदी का जलस्तर कम होने पर रेउसा इलाके में प्रभावित गांवों से बाढ़ का पानी तो घटा है। मगर बाढ़ प्रभावित तकरीबन 25 गांवों में संक्रामक रोग पैर पसारने लगे हैं। इन गांवों के 40 से ज्यादा बाढ़ पीड़ित मलेरिया बुखार की चपेट में आ गए हैं। स्वास्थ्य महकमे की अनदेखी से बाढ़ प्रभावित गांवों में रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

वहीं, जलस्तर घटने के साथ कटान भी तेज हो गई है। करीब डेढ़ सौ बीघा जमीन फसल सहित कटान की भेंट चढ़ गई है। उधर, तंबौर इलाके में शारदा नदी का जलस्तर कम होने से बाढ़ का पानी घटा है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां कम होने का नाम नही ले रही हैं। प्रभावित गांवों के आसपास जलभराव अभी भी है। गांव के कच्चे रास्तों पर कीचड़ भरा होने से आवागमन में दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।
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गांजरी इलाके में शारदा व घाघरा नदियों की बाढ़ से प्रभावित गांवों के बाशिंदों की मुसीबतें अनवरत बरकरार हैं। रेउसा प्रतिनिधि के अनुसार बैरागीपुरवा, आजादनगर, आशाराम पुरवा, निर्मलपुरवा, संबारीपुरवा, रामलालपुरवा, मौजीलालपुरवा, मोदीनगर सहित लगभग 25 गांवों में बाढ़ का पानी घटने पर कीचड़ व गंदगी की भरमार से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। लिहाजा, संक्रामक रोग पैर पसारने लगे हैं।

बैरागीपुरवा के तीरथ, लालजी, पेशकार, दुर्गापुरवा के रामनरेश, राजकिशोर, रघुनाथ, जैतहिया के सियाराम, मीना देवी, अनीता, पहलवान, जिन्नापुरवा के रामानंद, संध्या, अनीता, कमरुद्दीन, नन्हकू, फूलमती, ब्रजेश, नगीनापुरवा के सोनेलाल, जगरानी, मनिया, सुमित्रा और बिल्लरपुरवा के अंकुश, मनोहर, रोहित व सुनीता के साथ 40 से अधिक ग्रामीण मलेरिया बुखार की चपेट में आ गए हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में अब तक नही पहुंची हैं। जिसके चलते रोगियों को झोलाछाप चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं, नदी का पानी घटने के साथ कटान भी तेज हो गया है।

सोमवार से मंगलवार तक बिल्लरपुरवा के रामचंद्र की 12 बीघा, भरनी की 12 बीघा, मनोहर की 10 बीघा, फौजदारपुरवा के जगदीश की 12 बीघा, हरद्वारी की 20 बीघा, तथा कोनी में रहने वाले साधू, मुन्नीलाल व कमलेश की 27-27 बीघा जमीन फसल सहित कटान की भेंट चढ़ गई है।

तंबौर प्रतिनिधि के अनुसार, शारदा का जलस्तर कम होने के बाद भी प्रभावित गांवों के हालात बेहद खराब हैं। तंबौर से रजनापुर की सड़क को पानी ने पूरी तरह उखाड़ दिया तो बिसवां खुर्द-गंज संपर्क मार्ग जगह-जगह से उखड़ गया है। इसके अलावा पेट्रोल पंप से अकबरपुर जाने वाली सड़क पर पानी अब तक भरा है।

जिससे राहगीरों को आवागमन में काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों का जनजीवन अस्तव्यस्त है। पानी ने जो हालात बनाये हैं उनसे अब संक्रामक बीमारियां फैलाने आशंका बढ़ गई है। पानी ढुलकने से कीचड़ होने के कारण मच्छरों का प्रकोप चरम पर पहुंच गया है।

बाढ़ प्रभावित किसी गांव में कीटनाशक का अब तक छिड़काव नही किया गया है। वहीं, एसडीएम लहरपुर द्वारा क्षेत्र के चंदीपुरवा के 60, बोधवा के 129, बरक्षता के 185 व बरेला के 208 बाढ़ पीड़ितों को तंबौर स्थित बाढ़ चौकी पर राहत सामग्री वितरित की गई है।

बेघरों को नहीं मिली मदद, सड़क के किनारे बिता रहे दिन
रेउसा इलाके में घूसेपुरवा मजरा मेवड़ीछोलहा के 46 परिवार बाढ़ के कहर से बेघर हो गए हैं। इन बेघरों को अब तक कोई मदद नही मिली है। आसरा नही मिलने से यह बाढ़ पीड़ित मेवड़ीछोलहा-ताहपुर संपर्क मार्ग के किनारे झिल्ली तानकर रहने को मजबूर हैं।
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मुन्नीलाल, बखरन, सुंदर, हरद्वारी, कमलेश व जाबिर आदि ने बताया कि भारी बरसात के बीच झिल्ली के नीचे परिवार समेत गुजारा करना बेहद कठिन है। कहीं सुरक्षित ठिकाना मिल जाता तो आसानी रहती।
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