सैलाब में बह गई पुलिया
सीतापुर। जिले में बाढ़ से हालात भयावह होते जा रहे हैं। शुक्रवार रात रेउसा क्षेत्र की एक और पुलिया सैलाब में बह गई। इससे चार गांवों का मुख्यालय से संपर्क कट गया है। पानी में फंसे कई परिवारों ने सीतापुर से पलायन कर बहराइच जिले के बांध पर डेरा डाल दिया है। पचीसा गांव के लोगों को डेढ़ सप्ताह बाद भी टापू से बाहर नहीं निकाला जा सका है। प्रशासन भी पानी घटने का इंतजार कर रहा है।
रेउसा क्षेत्र के करीब 400 गांव इन दिनों बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। वहीं बैराजों से लगातार छोड़ा जा रहा लाखों क्यूसेक पानी स्थिति को और भयावह बना रहा है। तेज बहाव के चलते रेउसा के राजापुर गुमई मार्ग पर बनी पुलिया बह गई। इससे गुमई, गोड़वा समेत चार गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। चारों तरफ पानी भरा होने से बाढ़ में फंसे करीब डेढ़ सौ परिवारों ने सीतापुर से पलायन कर बहराइच जिले में घाघरा के किनारे बने बांध पर शरण ले रखा है। पचीसा टापू पर बसे परिवारों को डेढ़ सप्ताह बाद भी बाहर नहीं निकाला जा सका है। वहां के बाशिंदे इन दिनों बाढ़ का जबरदस्त दंश झेल रहे हैं। जिनके पास सरकारी मदद पहुंच पाना भी मुश्किल है। पचीसा गांव बाढ़ राहत चौकी मारूबेहड़ से इन दिनों करीब 10 किलोमीटर दूर है। वहीं पानी का तेज बहाव भी है। जिसमें इन दिनों नावें काम नहीं कर रही हैं। नतीजा पचीसा टापू के बाशिंदों को इन दिनों उनके हाल पर ही छोड़ दिया गया है। अब बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में बीमारियों ने भी पांव पसारना शुरू कर दिया है। तमाम ऐसे लोग हैं, जिन्हें उल्टी, दस्त व बुखार की शिकायत है, लेकिन बाढ़ के पानी की वजह से वे अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। दूषित पानी पीने की वजह से ही बाढ़ पीड़ित बीमार होते जा रहे हैं। उधर, बैराजों से 3,53,682 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिसकी वजह से हाल के दिनों में हालत सुधरने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। बाढ़ का पानी इन दिनों रेउसा कस्बे से महज एक किलोमीटर की दूरी पर ही बचा है। क्षेत्र के बाशिंदों की माने तो, अगर जलस्तर में इसी तरह की वृद्धि होती रही तो बहुत जल्द ही बाढ़ का पानी रेउसा कस्बे तक पहुंच जाएगा।
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बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा बैराज 1,42,466 क्यूसेक
शारदा बैराज 1,28,600 क्यूसेक
बनबसा बैराज 82,616 क्यूसेक
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बांध व सड़कें बनी सहारा
बहराइच हाईवे व बांध लोगों के काम आ रहे हैं। हाईवे व बांध पर ही बाढ़ पीड़ित शरण ले रहे हैं। यहीं पर लोगों ने अपने आशियाने बना लिये हैं, जिनके ऊपर लोगों की जिंदगी की गाड़ी खिसक रही है।