इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गांव के लोग घरों को छोड़ सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर रहे हैं। प्रशासन इस क्षेत्र में मदद के लिए आठ ट्रैक्टर-ट्रॉली लगाने की बात कह रहा है। इसके अलावा तंबौर क्षेत्र में शारदा नदी के पानी का स्थिर होना बताया जा रहा है। फिर भी नदी कटान कर रही है।
रेउसा व मारू बेहड़ प्रतिनिधि के अनुसार घाघरा नदी के रौद्र रूप में कोई परिवर्तन नहीं आया है। नदी का पानी पूरी रफ्तार से तटीय क्षेत्र की जमीन को काट रहा है। सोमवार की रात क्षेत्र के ग्राम कोनी में रोशन लाल, अंबरिका, लक्ष्मी, पेशकार व बाबू के घर कटकर नदी में समा गए हैं। इसी तरह से निर्मलपुरवा में विजयपाल, रामू व लालजी के घर कटकर नदी में बह गए हैं। जबकि गड़रियन पुरवा मेें विमलेश, किशोरी लाल व श्रीराम का घर कटकर नदी में समा गया है। नदी तेज रफ्तार से गांव को निगलती जा रही है। इस वजह से इस गांव में बसने वाले परिवार घरेलू सामान समेटकर विभिन्न वाहनों से सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर रहे हैं। इसी तरह से बरार, टिब्भा, सिसैया बाजार, दरियाना, महराजदीन पुरवा, ठेकेदार पुरवा, ठकुरन पुरवा आदि गांवों में घाघरा नदी कटान कर रही है। क्षेत्र की खेती योग्य भूमि भी कटकर नदी में बहती नजर आ रही है। प्रशासन का कहना है कि ग्रामीणों को घरेलू सामान ले जाने में दिक्कत न हो, इसलिए आठ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को इस क्षेत्र में लगाया गया है। घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकले ग्रामीणों ने क्षेत्र के गलियारों व सड़काें पर डेरा डालना शुरू कर दिया है। कल जहां पर रास्ते थे, वहां पर आबादी बसती जा रही है। पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे आ रहे हैं, जहां पर बारिश कहर बरपा रही है। तमाम परिवारों की रात की नींद व दिन का सुकून छिन गया है। लोग बारिश में भीगते और कांपते नजर आ रहे हैं। ऐसे परिवारों के लिए अभी प्रशासन की तरफ से कोई मदद नजर नहीं आ रही है।
तंबौर प्रतिनिधि के अनुसार शारदा नदी के बढ़ते जलस्तर में स्थिरता आई है। बावजूद शारदा नदी का पानी उसी वेग से तटीय क्षेत्र में कटान कर रहा है। बोधवा, चंदीभानपुर, असईपुर, काशीपुर आदि गांवों में शारदा नदी कटान कर रही है। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड द्वारा बनाये स्टड बहते नजर आ रहे हैं। इससे इस क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। यहां भी परिवार घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश मे निकल रहे हैं।