सीतापुर। जिलेे के हजारों मनरेगा मजदूर काम की तलाश में भटक रहे हैं, मगर उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। जबकि मनरेगा कानून के विपरीत जिम्मेदारों की मेहरबानी से बड़ी संख्या में चहेते परिवारों को 100 दिन से अधिक रोजगार दे दिया गया। यह खुलासा ऑडिट में हुआ। इस पर प्रशासन ने एक ब्लॉक के 11 पंचायत सचिवों से 53 हजार 39 रुपये की वसूली के आदेश दिए हैं। यह मामला बीते दो वित्तीय बरस का है।
रेउसा ब्लॉक में वित्तीय वर्ष 2015-16 में 25 ग्राम पंचायतों के 75 परिवारों को 224 दिन रोजगार दिया। जबकि प्रत्येक मनरेगा कानून के तहत अधिकतम 100 दिन क रोजगार देने का प्राविधान है। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2016-17 में छह ग्राम पंचायतों के 29 परिवारों को 97 दिन अधिक का काम मिला। यानी दो बरस में एक ही ब्लॉक के 31 ग्राम पंचायतों में 104 परिवारों को 321 दिन का सौ दिन से अधिक रोजगार दिया गया।
यह खुलासा ऑडिट रिपोर्ट में हुआ। दो बरस पहले हुए ऑडिट खुलासे में अब बीडीओ रेउसा ने 11 पंचायत सचिवों को धनराशि वसूली के आदेश जारी कर दिए। बीडीओ ने वर्ष 2015-16 में 100 दिन से अधिक रोजगार देने पर 36064 रुपये व 2016-17 में अधिक रोजगार देने पर 16975 रुपये की मजदूरी की वसूली आदेश जारी हुए हैं। यह रकम संबंधित पंचायत सचिव से वसूली की जाएगी।
दो साल बाद जागे बीडीओ रेउसा
मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों का ऑडिट 17 अक्टूबर 2016 में हुआ था। ऑडिट रिपोर्ट में यह तथ्य प्रकाश में आया था कि नियम विरुद्ध तरीके से जॉबकार्ड धारक परिवारों को 100 दिन से अधिक का रोजगार दिया गया है। बावजूद इसके जिम्मेदारों ने कोई कार्रवाई नहीं की। दो बरस बाद जिम्मेदारों की कुंभकर्णी नींद टूटी।
इनसे वसूली जाएगी धनराशि
ब्लॉक रेउसा के 11 पंचायत सचिवों से धनराशि वसूली के आदेश जारी हुए है। इनमें अमित साहू, राजेश बाबू शुक्ल, मुकेश नाथ, राम स्वरूप, मनोज कुमार, जगदेव प्रसाद, रोहित जोशी, विनोद कुमार, प्रदीप चौधरी, अजीत यादव व राजकुमार शुक्ल शामिल हैं। संबंधित पंचायत सचिव से तय रकम वसूली जाएगी।
रकम जमा न करने पर नहीं मिलेगी सितंबर की पगार
पंचायत सचिवों ने तीन दिन में कार्यक्रम अधिकारी रेउसा के खाते में रकम जमा करनी है। तय अवधि में तिथि में रकम की अदायगी न करने पर संबंधित को सितंबर का वेतन आहरित नहीं होगा। इसके लिए ब्लॉक के वरिष्ठ सहायक स्थापना को निर्देश दिए गए हैं।
इन ग्राम पंचायतों में दिया अधिक रोजगार
रेउसा की ग्राम पंचायत अजईपुर, बंभिया, बरी,बर्रा, बिलौता, गोविन्दापुर, हरिहरपुर नेवादा, एरापुर सिपौली, ईटगांव, जालिम नगर में 100 दिन से अधिक काम दिया गया। इसी प्रकार कनकरी, खरोहा, खुरवलिया, कोलिया छडिय़ा, लाडिलापुर, मल्लापुर, मुजेहना, पुरैनी बाजार, रसूलपुर, सरैंया भटपुरवा, सरौंया छतौना, सीपतपुर, थानगांव, थौरा, करसा, भिठनाफर्र, मनपुर, खरहरा,मनपुर में अधिक दिन का काम दिया गया है।
ये है मनरेगा कानून
मनरेगा एक्ट में 100 दिन से अधिक रोजगार देना का प्राविधान है। इस व्यवस्था के अनुसार एक वित्तीय बरस में 100 दिन रोजगार प्राप्त करने के लिए एक परिवार पात्र होगा। 100 दिन रोजगार की उपलब्धता को परिवार में रहने वाले सभी वयस्क व्यक्तियों के बीच विभाजित किया जा सकता है। पंजीकृत परिवार के सभी वयस्क व्यक्ति रोजगार प्राप्त करने को आवेदन प्रस्तुत करते हैं।
वर्जन
वर्तमान वित्तीय बरस में अभी तक किसी भी मनरेगा मजदूर को 100 दिन से अधिक रोजगार नहीं दिया गया है। 100 दिन से अधिक रोजगार देने पर संबंधित पंचायत सचिव व रोजगार सेवक से धनराशि वसूलने को प्राविधान है। यह धनराशि जिला रोजगार गारंटी निधि खाते में जमा की जाएगी।
- सुशील कुमार सिंह, उपायुक्त (श्रम रोजगार)