जिले में दस और नए आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सालय स्थापित होंगे। दो अस्पताल तो शहरी इलाके में खुलेंगे। जबकि आठ ग्रामीण इलाके में बनेंगे। आउटडोर में मरीजों का चेकअप होगा। साथ ही गंभीर रोगों से ग्रसित मरीजों को भर्ती की भी सुविधा मिलेगी। मुफ्त दवाएं भी दी जाएंगी।
शुरुआती दौर में ये अस्पताल किराए के भवनों में चलेंगे। योजना में 70 लाख रुपये का बजट रखा गया है। इस प्रोजेक्ट को जिला योजना में हरी झंडी मिल गई है। अब उसे शासन से मंजूरी मिलने का इंतजार है।
सीतापुर में आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा के 43 अस्पताल हैं। यहां के नीमसार, सिधौली, बिसवां एवं सीतापुर शहर में 25 शैया के अस्पताल हैं। जबकि सात अस्पतालों में केवल ओपीडी हैं। सभी अस्पताल संकट से जूझ रहे हैं।
इनकी सूरत बदलने और आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा को बढ़ावा देने को प्रशासन ने एक कार्य योजना बनाई है। योजना में सीतापुर जनपद में नए आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों की स्थापना करने का फैसला लिया। बाद में इनकी स्थापना को जिला योजना में दस नए आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पताल प्रस्तावित किए हैं।
प्रत्येक आयुर्वेदिक अस्पताल पर पांच-पांच लाख बजट खर्च होगा। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी बताते हैं कि जिले में दस और नए आयुर्वेदिक अस्पताल खोले जाएंगे। इनकी स्थापना के बाद आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों की संख्या बढ़कर 53 हो जाएगी। लहरपुर, लिलसी व प्रतापबेहड़ के आयुर्वेदिक व यूनानी अस्पतालों के भवन भी प्रस्तावित किए गए हैं।