सीएम योगी आदित्य नाथ ने अखिलेश सरकार की समाजवादी पेंशन योजना पर रोक लगा दी है। योगी सरकार का मानना है, कि समाजवादी पेंशन योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़झाला है।
लिहाजा, लाभार्थियों की पात्रता जांचने के निर्देश दिए गए हैं। योगी सरकार के इस फरमान से समाज कल्याण विभाग में हड़कंप मच गया है। जिले में 1 लाख 20 हजार लाभार्थियों को समाजवादी पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है।
इसके लिए पात्रों को दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होता है। उनका सत्यापन किया जाता है। जिसके बाद पात्र के खाते में पेंशन की धनराशि भेजी जाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बैठक के बाद समाजवादी पेंशन योजना को रोकते हुए इसके तहत चयनित लाभार्थियों की पात्रता जांचने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जांच करके यह पता लगाया जाए कि जिन लोगों को इस योजना का लाभ मिल रहा है, वे वास्तव में इसके पात्र हैं या नहीं। इस जांच को एक महीने में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के इस फरमान से योजना का लाभ ले रहे अपात्रों तथा समाज कल्याण विभाग के अफसर-कर्मियों में कार्रवाई के डर से हड़कंप मच गया है।
शुरुआत से ही विवादों रही योजना
समाजवादी पेंशन योजना अपने शुरुआती चरण से ही विवादों में घिरी रही। सत्तापक्ष के विधायकों व नेताओं पर अपने खास लोगों को लाभ दिलाए जाने के आरोप भी लगे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो शिकायत पर जांच में अब तक करीब तीन सौ अपात्र पाए गए।
जिनके नाम लाभार्थियों की सूची से हटा दिए गए। वहीं शहर की रानी कोठी में महकमे के सुपरवाइजर को फर्जी अभिलेखों सहित दबोचा गया। सुपरवाइजर विनोद कुमार वर्मा फर्जी ढंग से अपात्रों को पेंशन योजना का लाभ दिलवाने का धंधा चला रहा था। जिसके बाद विनोद कुमार वर्मा के खिलाफ केस दर्ज कराते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई है।