-हल्लौर में अंजुमन फरोग मातम के सालाना अशरे की दूसरी मजलिस में मौलाना ने मकसदे हुसैन और उनके पैगाम पर रोशनी डाली
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमाम बारगाह वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन फरोग मातम की ओर से आयोजित सालाना अशरे की दूसरी मजलिस सोमवार की रात आयोजित हुई। इसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। मजलिस को मौलाना शाहकार हुसैन जैदी ने संबोधित कर मकसदे इमाम हुसैन और वाक्याते कर्बला पर रोशनी डाली।
मौलाना शहकार हुसैन ने कहा कि वाक्याते कर्बला सिर्फ इतिहास नहीं है, यह हर क्रांति की बुनियाद है। आज भी दुनिया में इमाम हुसैन का चिराग रोशन है, जो जुल्म के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक है। मौलाना ने कहा कि मुहर्रम पर निकाले जाने वाले अलम, ताबूत, जुलजनाह और ताजिया के जुलूस इमाम हुसैन की जीत का एलान करते हैं।
इमाम हुसैन को मानने वाला कभी भी जालिम, अत्याचारी और अन्याय के सामने नतमस्तक नहीं हो सकता है। इमाम हुसैन की शहादत और वाक्याते कर्बला अन्याय और जालिम से लड़ने का हौसला देती है। मजलिस के आखिर में मौलाना शहकार ने कर्बला की तपती जमीन पर तीन दिन के भूखे प्यासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत का मंजर बयान किया तो हर किसी की आंखें आसुओं से तरबतर हो गईं। पूरा मजमा हाय हुसैन की सदा से गूंजता रहा।
मजलिस से पहले मर्सिया हैदरे कर्रार और उनके सहयोगी ने पढ़ा। इस दौरान अंजुमन फरोग मातम के सदर इंजीनियर मोहम्मद मेंहदी, सचिव इकबाल मेंहदी, मौलाना आदिल अब्बास, मौलाना कुमेल, सुल्तान मेंहदी, सैय्यद हसन एडवोकेट, काजिम कर्बलाई, खादिम अब्बास, कसीम रिजवी, काजिम रजा, अजीम हैदर, तसकीन हैदर आदि मौजूद रहे।