सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के दसवें दीक्षांत समारोह में सोमवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों से विकसित भारत-2047 के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं बल्कि संस्कार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण भी है। समारोह में 37 मेधावियों को स्वर्ण पदक और 25 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि दी गई। साथ ही 11 मेधावियों को डोनर स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन में नई जिम्मेदारियों और संकल्पों की शुरुआत का अवसर है। उन्होंने स्वर्ण पदक विजेताओं, विशेषकर 28 छात्राओं की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि बेटियों की सफलता पूरे समाज और राष्ट्र की प्रगति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज और देश के विकास के लिए करना चाहिए।
उन्होंने भगवान बुद्ध की पावन भूमि कपिलवस्तु का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मानवता, करुणा और सामाजिक संवेदनशीलता को मजबूत करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से सफलता के साथ संस्कार, समर्पण और मानवीय मूल्यों को भी जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और सतत विकास पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भविष्य में जल संकट बड़ी चुनौती बनेगा। उन्होंने ''''वेस्ट टू वेल्थ'''', मियावाकी वन, तालाब निर्माण और जल संचयन जैसे प्रयासों को अपनाने की अपील की। साथ ही दहेज प्रथा के उन्मूलन, सर्वाइकल कैंसर जागरूकता और बालिकाओं के स्वास्थ्य पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, डिजिटल नवाचार, स्टार्टअप, कौशल विकास और आत्मनिर्भर भारत अभियान विकसित भारत की मजबूत नींव हैं और इन्हें आगे बढ़ाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
समारोह में मुख्य अतिथि और प्रख्यात पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. मधुलिका अग्रवाल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, ड्रोन, क्वांटम टेक्नोलॉजी और अनुसंधान को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए विद्यार्थियों को आजीवन सीखने और नवाचार अपनाने का संदेश दिया। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
कुलपति प्रो. कविता शाह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि 13.53 करोड़ रुपये के रूसा अनुदान से आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया गया है। विश्वविद्यालय में 170 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। 89 शोध अनुदान और 12 पेटेंट के माध्यम से शोध और नवाचार को नई दिशा मिली है।
दीक्षांत समारोह में 52,176 स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों की उपाधियां डिजि लॉकर पर अपलोड की गईं। इस दौरान ''''किलकारी'''' क्रेच और ''''कलरव'''' बाल उपवन का लोकार्पण, शिक्षकों की पुस्तकों का विमोचन, दिव्यांगजनों के लिए ''''केबो'''' सॉफ्टवेयर का अनावरण तथा उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान भी किया गया।
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, सांसद जगदंबिका पाल, विधायक विनय वर्मा, स्थानीय विधायक श्यामधनी राही, विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रजनीकांत पांडेय, विद्या परिषद और कार्य परिषद के सदस्य, शिक्षकगण, कर्मचारी, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।