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बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय

Tue, 19 Jul 2016 11:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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शोहरतगढ़ के वन बाबा कुटी पर भंडारा करते भक्त। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सिद्धार्थनगर। गुरु पुर्णिमा मुख्य रूप से गुरु व शिष्य के बीच अनुशासन व अनुबंध का पर्व है। गुरु के तीन रूप होते है। गुरु को ब्रह्मा का स्वरूप दिया गया है, क्योंकि शिष्य को नया जन्म देते है। विष्णु के रूप में जाने जाते है क्योंकि पालन करते है। महेश भी माना जाता है क्योंकि शिष्य के दोषों का संहार करते है।
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यह प्रवचन जिला संयोजक गायत्री शक्तिपीठ अशोक कुमार त्रिपाठी ने कही। वह मंगलवार को शक्तिपीठ में आयोजित पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ के अवसर पर शिष्यों के बीच प्रवचन कर रहे थे। गुरु के महत्व को बताते हुए कहा कि जब अर्जुन ने सर्वस्व समर्पित कर दिया तो श्रीकृष्ण ने गुरु धर्म का निर्वहन करते हुए गीता का ज्ञान देकर अज्ञानता को दूर किया। मूल ज्ञान दिया कि अहंकार किसी भी व्यक्ति को पतन के रास्ते पर ले जा सकता है।
आगे कहा कि शिष्य का रिश्ता समर्पण के आधार पर टिका होता है। वरिष्ठ परिवाचक महादेव प्रसाद तिवारी ने कहा कि आत्मा-परमात्मा के बीच ज्ञान का मार्ग गुरु ही दिखाता है। उपदेश तो कोई भी दे सकता है लेकिन गहराई में उतर कर ज्ञान रूपी हीरे मोती निकालने का मार्ग गुरु दिखाता है।
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संत कबीर ने भी गुरु की महिमा का बखान दोहे में किया है। इस दौरान कैलाशनाथ पांडेय, बीएन सिंह, ब्रजभूषण शर्मा, प्रेमनारायण तिवारी, डा. आरपी मिश्रा, रामप्यारे चौधरी, सोनू, सत्यम, रामकृपाल, अरविंद श्रीवास्तव, तौलेश्वरनाथ चौबे, रविंद्र मद्देशिया, देवेंद्र नाथ त्रिपाठी, सूरज जायसवाल, राघवेंद्र गुप्ता, योगेंद्र मणि त्रिपाठी, साधना श्रीवास्तव, किरण श्रीवास्तव, सुशीला श्रीवास्तव, कुसुम कसोधन, निर्मला सिंह, नीलम श्रीवास्तव, सत्यभामा मिश्रा, सुमन द्विवेदी, सोनी, फूलचंद्र आदि मौजूद रहे।
शोहरतगढ़। ब्रह्मलीन वन बाबा कुटी पर मंगलवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पूजन व भंडारे का आयोजन सुखदेव राम के नेतृत्व में हुआ। इसमें क्षेत्र के लोगों ने भारी संख्या में पहुंच कर गुरु का आशीर्वाद व प्रसाद ग्रहण किया।
पंडित राममिलन त्रिपाठी ने कहा कि आषाढ़ के शुक्ल पक्ष के दिन गुरु की पूजा का विधान शास्त्रों में बताया गया है। अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को ही गुरु कहा जाता है। संसार में मानव को जन्म देने वाले माता-पिता से बढ़कर गुरु का स्थान सर्वोपरि है।
इसलिए सभी लोगों को गुरु का पूजन-अर्चन करना चाहिए और अपने माता-पिता व समाज के लोगों से मिलजुल कर सौहार्द के साथ जीवन यापन करना चाहिए। इससे ही समाज में सामाजिक समरसता बनी रहेगी है। हियुवा नेता सुभाष गुप्ता ने कहा कि गुरु के बिना मनुष्य का जीवन पशु के समान है। गुरु ही हमें जीने और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताता है। ऐसे में सभी लोगों को गुरु से मिली शिक्षा का सदुपयोग कर के समाज व देश हित में कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए।
इसके बाद क्षेत्र के लोगों में प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान सौरभ गुप्ता, संतराम प्रजापति, राम प्रसाद गौतम, रामजीत चौरसिया, बाबा शंभू दास, त्रिवेणी दास, मनोहर दास, पहाड़ी बाबा, संजय कसौधन, जानकी देवी आदि मौजूद रहे।
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