संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन गुप्त नवरात्र की शुरुआत होती है। चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। वहीं, गुप्त नवरात्र में देवी की दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। इस दौरान तांत्रिक, अघोरी तंत्र मंत्र और सिद्धि प्राप्त करते हैं।
ऐसे में गुप्त नवरात्र का महत्व बहुत विशेष होता है। इस दौरान देवी की साधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं। यह जानकारी देते हुए गालापुर वटवासिनी महाकाली मंदिर के व्यवस्थापक पं. डॉ. ठाकुर प्रसाद मिश्र ने बताया कि आषाढ़ मास 12 जून, बृहस्पतिवार से आरंभ हो चुका है। इस महीने में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है। पूरे वर्ष में चार नवरात्र आती है, जिनमें से एक गुप्त नवरात्र होती है। हिंदू धर्म में इन नौ दिनों का बहुत खास महत्व होता है। एक गुप्त नवरात्र माघ में भी आती है। मान्यता है कि ये नवरात्र सिद्धि और साधना के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। साथ ही, तंत्र मंत्र के साधक इन दिनों में विशेष रूप से साधना रखते हैं।
गुप्त नवरात्र लोगों के बीच ज्यादा प्रचलित नहीं है, जिसके पीछे का कारण यही है कि इसमें तंत्र मंत्र के साधक ज्यादा साधना रखते हैं। माना जाता है कि इस दौरान मां दुर्गा और उनकी 10 महाविद्याओं की पूजा करने से व्यक्ति को विशेष फल की प्राप्ति हो सकती है।
आषाढ़ मास गुप्त नवरात्र नियम : माना जाता है कि भूलकर भी गुप्त नवरात्र में तामसिक भोजन जैसे- मांस, प्याज, लहसुन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।