काम के इंतजार में खड़े रहते हैं मजदूर
लॉकडाउन खुलने के बाद भी श्रमिकों को नहीं मिल पा रहा है काम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। लॉकडाउन खुलने के बाद श्रमिकों को आसानी से काम नहीं मिल पा रहा है। दूरदराज के गांवों के श्रमिक सिद्धार्थ तिराहे पर भोर में ही पहुंच रहे हैं ताकि उन्हें काम मिल जाए और गृहस्थी की गाड़ी को चलाया जा सके। सिद्धार्थ तिराहे पर बुधवार को सूर्योदय से पहले ही 200 से अधिक श्रमिक खड़े थे। जिन्हें कोई काम मिला, उन्हें तसल्ली मिली। जिन लोगों को काम नहीं मिला वे अपने भाग्य को कोसते नजर आए। श्रमिकों के अनुसार कोरोना काल के बाद लेबर मंडी में काम के लिए बुलाने वालों की संख्या कम हो गई है। मकान निर्माण, टाइल्स, फर्नीचर के काम बहुत कम हो गए हैं। छोटे-छोटे काम मिल रहे हैं तो एक-दो दिन बाद ही उन्हें फिर मंडी की राह देखने की नौबत आ रही है। जबकि कोरोना की दूसरी लहर में कई श्रमिकों की तबीयत खराब थी और वे कर्जदार हो गए हैं। सिद्धार्थ तिराहे पर रोवापार के भुलई ने बताया कि 20 मई को उनकी बेटी की शादी हुई है, जबकि कोरोना संक्रमण के दौर में वह बीमार थे। इधर रोज काम नहीं मिल रहा है। इस कारण चिंता है कि कर्ज का भुगतान कैसे होगा। बभनी के बासुदेव ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान लगन में उन्होंने एक टेंटवाले के यहां काम किया तो गृहस्थी चली। एक दिन काम मिला, अगले दिन फिर मंडी में काम के लिए इंतजार करना पड़ा। पटनी जंगल निवासी राजगीर बाबूराम ने कहा कि लॉकडाउन खुलने के बाद काम मिलना मुश्किल हो गया है। बृहस्पतिवार को उन्हें लेबर मंडी में लगातार तीसरे दिन काम नहीं मिला। जब काम नहीं मिलता है तो घर जाने का मन नहीं करता है। अहिरौली के रहने वाले कमलेश ने बताया कि 16 जून को बहन की शादी है। लॉकडाउन में एक माह कमाई नहीं हुई। मनरेगा का काम भी नहीं मिला। बहन की शादी सिर पर है, घरेलू खर्च चलाने भर का काम नहीं मिल रहा है। कोरोना ने तो श्रमिकों की कमर तोड़ दी है।