स्वास्थ्य मंत्री के कॉलेज में 65 एंबुलेंस रोककर कर्मियों ने दिया धरना
सिद्धार्थनगर/बांसी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जय प्रताप सिंह के प्रबंधतंत्र के अंतर्गत संचालित रतनसेन इंटर कॉलेज बांसी में जिले की 65 एंबुलेंस के पहिए थमे हुए हैं। जिले की 290 एंबुलेंस के चालकों ने विरोध प्रदर्शन के लिए स्वास्थ्य मंत्री के कॉलेज का चयन किया है। लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल जारी रही।
जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग 108, 102 नंबर एंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अमर गुप्ता ने बताया कि कोरोना काल में उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की जान बचाने काम किया था। स्वास्थ्य विभाग ने एंबुलेंस संचालन के लिए नई एजेंसी को मैन पॉवर का ठेका दे दिया है। इस कारण वे बेरोजगार हो गए। जिला मुख्यालय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम तय था। इस लिए संगठन के लोगों ने विरोध के लिए स्वास्थ्य मंत्री के कॉलेज को चुना।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 1200 एंबुलेंस कर्मी बेरोजगार हो गए। उनमें जिले के 290 एंबुलेंस कर्मी शामिल हैं। संगठन की ओर से आकस्मिक सेवा के लिए पांच एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग को दी गई है, जबकि 65 एंबुलेंस के पहिए थम गए हैं। धरने पर दिनेश त्रिपाठी, बृजेंद्र सिंह, विमल चौधरी, धर्मेंद्र सक्सेना, दयाशंकर वर्मा, अश्विनी पांडेय आदि बैठे थे।
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कई नेताओं ने किया समर्थन
समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष कमाल खान ने मंगलवार को धरनास्थल पर पहुंचकर सभी कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि वह उनके साथ खड़े है। उन्होंने एंबुलेंस कर्मियों की मांगों को पूरा करने के लिए सरकार से मांग की।
धरनास्थल पर पहुंचे कांग्रेस के जिलाध्यक्ष काजी सुहेल अहमद ने कहा कि कोरोना काल में अपनी जान का जोखिम उठाने वाले एंबुलेंस कर्मियों को बेरोजगार कर देना अन्यायपूर्ण है। अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश प्रवक्ता दिवाकर विक्रम सिंह ने विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि सरकार को एंबुलेंस कर्मियों की मांगों को सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए।
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स्वास्थ विभाग ने लगाए वाहन
सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल के दौरान मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की पूरी कोशिश की जा रही है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत 14 ब्लॉकों में दो-दो गाड़ियां लगाई गई हैं। उन गाड़ियों के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।