संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। सरकार जहां ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं का पलायन रोकने के लिए गांव में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनरेगा से सौ दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने का दवा कर रही है।
वहीं भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के ग्राम प्रधान, सचिव, रोजगार सेवकों सहित अन्य जिम्मेदार पलीता लगा रहे हैं। भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के ग्राम पंचायत गड़ावर के मनरेगा मजदूरों ने बीडीओ को शिकायती पत्र देकर प्राधान, सचिव व टीए पर काम न देने का आरोप लगाते हुए काम दिलवाने की मांग की है।
ग्राम पंचायत गड़ावर के कंचन, विनोद, जिनकी, रिंकू, रमेश, प्रियंका, आनंद, अनिता, तुलसी, उर्मिला, दिनेश, मायादेवी, आरती, गीता आदि मनरेगा मजदूरों ने बीडीओ आलोक दत्त उपाध्याय को शिकायती पत्र दिया है।
पत्र में मजदूरों ने बताया कि हम लोगों की आर्थिक स्थिति सही नहीं है। मनरेगा के भरोसे घर का खर्च चलता है। ग्राम प्रधान, सचिव व टीए के डिमांड के बाद पचास से सौ रुपये देकर हाजिरी व फोटो खिंचवाकर वापस कर देते हैं। बिना काम के ही लोगों के खाते में मजदूरी का पैसा भेज कर 200 रुपये देकर बाकी निकलवाकर ले लेते हैं।
मनरेगा मजदूरों ने बताया कि 2015 से 2022 तक हम लोगों को 100 दिनों का काम दिया गया, मगर ग्राम प्रधान, सचिव व टीए के द्वारा राजनीतिक द्वेष के कारण काम नहीं दिया जा रहा है, जबकि गांव में प्रधान के द्वारा कागजों में कई काम एक साथ कराए जा रहे हैं।
इस संबंध में बीडीओ आलोक दत्त उपाध्याय ने बताया कि शिकायती पत्र मिला है। इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई के साथ ही मनरेगा मजदूरों को काम उपलब्ध कराया जाएगा।