सिद्धार्थनगर। मछली पालन करने वालों के लिए अच्छी खबर है। महिलाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए सरकार ऐसी महिलाओं को मछली पालन के लिए अनुदान दे रही है, जिनके पास पट्टे का तालाब हो और उसकी समय सीमा पांच वर्ष बची हो। सघन मत्स्य पालन के लिए एयिरेशन सिस्टम की स्थापना नामक नई योजना शुरू की गई है। योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी विभाग के पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए तीन सितंबर तक तिथि निर्धारित की गई है। आवेदन की जांच के बाद पात्रता के आधार पर चयन किया जाएगा।
जनपद में मछली पालन की दृष्टि से प्रदेश में अच्छे स्थान पर है। यहां बड़े भू-भाग पर लोग मछली पालन कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने खेतों में तालाब बनावाकर मछली पालन शुरू किया गया है। इसमें बढ़नी और खुनियांव ब्लॉक क्षेत्र में किसान बड़े रकबे पर तालाब बनाकर मछली का पालन कर रहे हैं। इसके साथ ही जिले में बड़ी तादाद लगभग डेढ़ लाख आबादी मछुआ समुदाय के लोगों की होगी। सरकार मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार की योजनाएं चला रही है। इस बार महिलाओं के लिए अलग योजना शुरू की है। इसमें केवल महिलाओं को योजना का लाभ दिया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि महिलाएं भी सशक्त हो सकें और परिवार को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने में सहयोग कर सके। इसलिए उनकी खातिर सरकार ने एयिरेशन सिस्टम की स्थापना प्रदेश के सभी जनपदों में प्रारंभ की है। इस संबंध में सहायक निदेशक मत्स्य नंद किशोर ने बताया कि मछली पालन में महिलाओं के लिए एक योजना शुरू हुई है। इसमें अनुदान पर राशि दी जाएगी, जिससे महिलाएं मछली पालन करके तरक्की कर सकें।
आवेदन करने से जुड़ी जानकारी
पांच अगस्त से ऑनलाइन आवेदन शुरू हुआ है, जिसकी अंतिम तिथि तीन नवंबर है। योजना में तालाबों के ऐसे सभी पट्टाधारक आवेदन कर सकते हैं, जिनके पट्टे की अवधि में न्यूनतम 5 वर्ष अवशेष हो, योजना के लिए आवेदक को इकाई लागत 75 हजार रुपये प्रति यूनिट पर सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत अनुदान तथा अनुसूचित जाति की महिलाओं लिए 60 प्रतिशत अनुदान है। योजनांतर्गत अन्य विवरण, इकाई लागत आवेदन करने की प्रक्रिया, आवेदन के साथ संलग्न किये जाने वाले अभिलेख व विस्तृत विवरण विभागीय विभागीय वेबसाइट पर देखा जा सकता है। आवेदन के लिए आधार, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति और पट्टे से संबंधित कागजात जरूरी है।