जिले में लगातार चौथे दिन शुक्रवार को भी सूर्य देव के दर्शन नहीं हुए। बादलों की ओट में दुबके सूर्य की झलक पाने को लोग पूरे दिन तरसते रहे। गलन और शीतलहर का कहर जारी रहा।
राहत पाने के लिए लोग अलाव की शरण में रहे। हालांकि इसकी व्यवस्था भी खुद के भरोसे ही करनी पड़ रही है। नगरीय क्षेत्रों के अलावा कहीं भी सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने का इंतजाम नहीं हुआ है। यहां तक कि रेलवे स्टेशन और रोडवेज परिसर में भी लोग ठंड के आगे बेबस बने हुए हैं।
शुक्रवार को तापमान में कोई खास अंतर तो नहीं रहा, मगर नमी में जरूर इजाफा दर्ज हुआ। 65 फीसदी से अधिक आद्र्रता के कारण हाड़ कंपाती ठंड में जनजीवन बेहाल रहा। दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है।
बाजारों में चहल-पहल कम रही। सड़कों पर सूनापन हावी रहा। बेहद जरूरी काम से ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। इसी का असर है कि बसों-ट्रेनों में भी भीड़ कम हो गई है।
सामान्य दिनों में यात्रियों से भरी रहने वाली लखनऊ जाने वाली बसों में यात्री घट गए हैं। रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक मुकेश कुमार के मुताबिक ठंड के कारण यात्रियों की संख्या घटने से आय भी प्रभावित हुई है।
दूसरी ओर, सर्दी के कारण आम दिनचर्या भी बुरी तरह चरमरा गई है। सुबह 10 बजे तक सड़कों पर सन्नाटे की स्थिति दिख रही है।बुजुर्गों के मुताबिक इस तरह का मौसम दिसंबर मध्य या जनवरी के पहले पखवाड़े तक दिखता है, मगर इस बार आधी जनवरी के बाद सर्दी ने जोर पकड़ा है। ठंड का यह कहर अगले कुछ दिनों तक बने रहने की संभावना जताई जा रही है।