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Siddharthnagar News: चोकर निकाल कर बिक रहा सफेद आटा, लोग हो रहे बीमार

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सिद्धार्थनगर। वर्तमान में लोग सफेद रोटी खाने के चक्कर में चोकर निकाला हुआ आटा खा रहें हैं। आटे से चोकर के साथ ही फाइबर निकल जाने से लोग बीमार हो रहे हैं। महंगाई के दौर में किसानों के घर का गेहूं फ्लोर मिल जा रहा है और वहां से बना हुआ आटे का पैकेट लोगों के घरों तक पहुंच रहा है, इससे आटा की कीमत दोगुनी हो जा रही हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है कि लोग गेंहू सूखा कर उसे पिसवाना नहीं चाह रहे हैं। जबकि चिकित्सकों की माने तो फाइबर की कमी से कब्ज और मोटापे की समस्या बढ़ती है। साथ ही पाचन शक्ति भी क्षीण हो जाती है।
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चिकित्सकों ने बताया कि गेंहू का आटा चोकर युक्त होने से वह फाइबर से भरपूर होता हैं। इससे यह आटा यह सुनिश्चित करता हैं कि आपका पेट लंबे समय तक भरा होना चाहिए। वह आपको भूख से बचने में मदद करता है। बताया की सफेद आटे से चोकर निकल जाने से इससे मोटापा और कब्ज की समस्या बढ़ जाती है। बदली हुई जीवन शैली में कम महिलाएं ही घरों में गेहूं की सफाई और धुलाई कर रही हैं, जबकि पुरुष भी आटा चक्की तक गेहूं ले जाने को एक बड़ी समस्या समझ रहे हैं। इसी कारण पैकेट वाले आटे का बाजार बढ़ता जा रहा है। आटा चक्की में कम हुई गेहूं की गठरी भी इसकी गवाही दे रही है कि बदली हुई सोच ने लोगों को महंगाई और बीमारी की ओर ढकेल दिया है।
किसानों के घर से गेंहू निकल दोगुना दाम में बिकता हैं आटा
गल्ला व्यापारी विघनेश्वर ने बताया कि नया गेंहू 21.50 रुपया किलों बिक रहा हैं। जबकि वहीं पुराने गेंहू का रेट 23 से 24 रुपया किलो है। लोटन क्षेत्र के किसान अरविंद ने बताया कि किसानों के घर से गेंहू 21 रुपया किलो बिचौलिया खरीदते हैं। उसे फ्लोर मील पर 23 से 24 रुपया किलो बेचते हैं। किसान गेंहू पिसवाने के लिए जाए तो उसे तीन से चार रुपया किलो आटा पिसवाई देना पड़ेगा। इससे किसान के गेंहू की कीमत 25 से 26 रुपया किलो हो जाता हैं। लेकिन फ्लोर मिल से निकलने वाला सफेद आटा 30 से 40 रुपया किलो तक बिकता हैं। वही रोटी सुंदर बनाने के चक्कर में लोग सफेद आटे को खरीद कर खा रहे हैं।
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इस कारण सफेद होती है रोटी
प्रधानाध्यापक अश्वनी शुक्ला ने कहा कि अब लोग आटा चक्की पर गेहूं पिसवाने को छोटा काम समझ रहे हैं। कामकाजी महिलाओं की संख्या बढ़ने से भी रेडीमेड आटे की मांग बढ़ गई है। दुकानदारों के अनुसार फ्लोर मिल में गेहूं का चोकर छिल दिया जाता है। उसके बाद उससे मैदा जैसा पतला आटा पैक किया जाता है। उसी से सूजी और चोकर भी बनता है, चोकर वाले आटे के रंग में गुलाबीपन होता है और इसका स्वाद भी अच्छा होता है।



अब तो नहीं निकल रहा है खर्च



पांच साल पहले आटा चक्कियों में गेहूं की इतनी गठरी आती थी कि रात में भी पिसाई करनी पड़ती थी। हर दिन 30 से 35 लोग गेहूं की पिसाई कराने आते थे, लेकिन अब तो 12 से 24 लोग ही आ रहे हैं। आटा चक्की में गेहूं कम आ रहा है। कुछ लोग आते भी हैं तो वह आटा खरीदने आ रहे हैं। अधिकतर लोग आटा पिसवा कर खाने के जगह बाजार से खरीद कर खा रहें हैं।
कृष्णा, आटा चक्की मालिक


फोटो हैं
फाइबर युक्त आटा खाने से कब्ज और मोटापे की नहीं होती समस्या
फाइबर युक्त भोजन करने से पूरा दिन पेट भरा रहता हैं। फाइबर युक्त खाने से भोजन धीमी गति से पचता है। इससे मोटापा, कब्ज व अन्य बीमारियां नहीं होने पाती हैं। गैस्ट्रों की भी समस्या नहीं रहती है। जबकि फाइबर निकल जाने से बदहजमी व अन्य बीमारियों का शिकार होने लगते हैं। भूख भी बढ़ने लगती हैं। इससे वजन बढ़ता हैं, वजन बढ़ने से अनेक प्रकार की बीमारियों से लोग ग्रसित होने लगते हैं। यदि किसी व्यक्ति को पेट संबंधित बीमारी हो तो उन्हें फाइबर युक्त भोजन डॉक्टर के सलाह से लेना चाहिए।
डॉ. रक्षा, सहायक प्रोफेसर गृह विज्ञान


फोटो हैं-
गेहूं कम, आटा बिक रहा ज्यादा
बाजार में 30 से 40 रुपये किलो आटा बिक रहा है। किराना मंडी की दुकान में पहले लोग गेहूं खरीदते थे, लेकिन अब ज्यादातर लोग आटा खरीद रहे हैं। पहले लोग गेहूं खरीदकर उसे साफ कराकर धुल करके पिसाई कराते थे। लोगों को परिवार के सेहत की चिंता ज्यादा थी। एक जमाना था जब लोग गेहूं की फसल की कटाई के बाद उसे घर में स्थित पत्थर के जाते पर हाथों से गेहूं पीसकर उसकी रोटी बनाकर खाते थे। सभी लोग स्वस्थ और निरोगी रहते थे।
दीपक दूबे

पैकेट और चक्की के आटे के दाम में है अंतर
आटा चक्की पर गेहूं की पिसाई का खर्च 3 से 4 किलो आता है। वहीं बाजार में विभिन्न ब्रांड के बिकने वाले आटे पांच किलो के पैकेट 160 से लेकर 180 रुपए तक मिल रहे हैं। वहीं फुटकर में 35 से 40 रुपया किलो तक आटा बिक रहा हैं। ऐसे में लोग गेहूं की चुनाईं-सफाई और उसे आटा चक्की तक ले जाने की जहमत से बचने के लिए पैकेट वाला आटा खरीद कर उसको प्रयोग में लाना सुलभ समझते है।
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छत पर बंदरों के आतंक से नहीं सुखाते आटा
शहर के महिलाओं ने बताया कि छत पर गेंहू सुखने के लिए डालने पर बंदर उसे छींट देते हैं। इससे गेंहू को बार-बार धोकर सुखाना पड़ता हैं। ऐसे में मार्केट में पीसा हुआ आसानी से आटा मिल जाता हैं और गेंहू पिसवाने जाने में की समस्या से निजात मिल जाता है।
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