हाथियों के झुंड द्वारा रौंदी गई धान की फसल दिखाता काश्तकार।
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सिद्धार्थनगर। धान की कटाई और मड़ाई तेज हो गई है। इसके साथ ही बिक्री का सिलसिला भी शुरू हो गया है। बावजूद जिले में धान खरीद के लिए सरकारी तंत्र तैयार नहीं हुआ है। जिले में स्थापित कुल 38 क्रय केंद्रों में अधिकांश सिर्फ कागजों पर चल रहे हैं। विभाग खुद मान रहा है कि कई संस्थाओं के पास धन उपलब्ध न होने के कारण क्रय केंद्र शुरू नहीं हो पाए हैं। ऐसे में किसान परेशान हैं। आर्थिक तंगी झेलते किसानों को मजबूरी में खुले बाजारों में उपज बेचनी पड़ रही है।
जिले में 1.66 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती हुई है। फसल पकने के बाद इसकी कटाई शुरू हो चुकी है। कई क्षेत्रों में किसान मड़ाई भी कर रहे हैं। छठ से पहले तक तक नया धान का चावल भी बाजारों में आ जाता है। मगर किसानों को उपज का वास्तविक मूल्य देने का ढोल पीट रहे विभाग इससे बेखबर बना हुआ है।
उपज खरीदने के लिए अभी क्रय केंद्र शुरू नहीं हो पाए हैं, जबकि क्रय केंद्रों पर एक नवंबर से ही खरीद शुरू करने का निर्देश था। जिम्मेदार भी खुद मान रहे हैं कि अधिकांश क्रय केंद्र क्रियाशील नहीं हो पाए हैं। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी जितेंद्र यादव का कहना है कि सभी क्रय केंद्र चालू कराए जा रहे हैं। उनकी फोटो भी मंगाई जा रही है। हालांकि दूसरी तरफ उनका यह भी कहना है कि पीसीएफ सहित कई खरीद संस्थाओं के पास धन उपलब्ध नहीं हो पाया है।
ऐसे में इनके केंद्र खुलने में देरी हो रही है। बता दें कि 1470 रुपये के समर्थन मूल्य पर धान खरीदने के लिए जिले में कुल 38 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें सर्वाधिक 25 क्रय केंद्र पीसीएफ के ही हैं। विपणन विभाग को नौ, कर्मचारी कल्याण निगम और एग्रो को 2-2 केंद्र आवंटित है।