सिद्धार्थनगर जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल है। पच्चीस लाख से अधिक आबादी वाले जिले में महज 54 चिकित्सक ही तैनात हैं। विभाग की लाख कोशिशों के बाद भी शासन स्तर से चिकित्सक नहीं उपलब्ध हो सकें, इस कारण आज भी दर्जन भर पीएचसी कंपाउंडर के सहारे संचालित हो रहे हैं।
दशकों से बनी इस समस्या के समाधान में सभी सरकारें नाकाम रही हैं। ऐसे में जिले के मरीज निजी अस्पतालों की सेवाएं लेने को मजबूर हैं। जिले में आबादी के सापेक्ष चिकित्सकों की अनुपलब्धता है।
25 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था मुहैया कराने के लिए 57 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। समुचित स्वास्थ्य सहूलियत के लिए यहां 186 पद सृजित हैं बावजूद इसके यहां तैनाती सिर्फ 54 चिकित्सकों की है।
हालात यह है कि खुद जिला अस्पताल सर्जन की कमी से जूझ रहा है। तैनात सर्जन के रिटायर्ड होने के बाद यहां अब तक सर्जन की तैनाती नहीं हैं। इटवा तहसील क्षेत्र के पंचमोहनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को कई वर्षों से कंपाउंडर चला रहे हैं। यही हालात अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की भी है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रो पर जैसे तैसे एक चिकित्सक को तैनात कर काम लिया जा रहा है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित लाभ न मिलने से लोगों में निराशा है और उन्हें इलाज के नाम पर शोषण का शिकार होना पड़ता है।
पिछड़े जनपदों की श्रेणी में शुमार इस जिले को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की कोई कोशिश जनप्रतिनिधियों के स्तर से भी नहीं हुई जिससे स्थिति में कोई सुधार नहीं है और लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी राजेंद्र कपूर का कहना है कि शासन को चिकित्सकों की कमी के बारे में बताया गया है। चिकित्सकों की डिमांड की गई है चिकित्सक मिलें तो व्यवस्था बेहतर होगी।