संवाद न्यूज एजेंसी
सकारपार। समय से पहले पछुआ हवा चलने से सर्वाधिक गेहूं की पछेती फसल को नुकसान होने की आशंका है। गेहूं की फसल की सिंचाई हुए लगभग दो महीना पूरा होने को है। इस बार बारिश न होने के कारण खेतों में नमी कम है। वहीं दूसरी तरफ चार-पांच दिन से चल रही तेज पछुवा ने गेहूं की फसल में बरकरार नमी को सुखाने का काम शुरू कर दिया है।
गेहूं की बुवाई से लेकर फसल पकने तक पौधों को खेतों में ठंड जलवायु की विशेष आवश्यकता होती है। क्योंकि जब खेतों में नमी रहती है तो पौधे ऊपर बढ़ने के बजाय जड़ों से कल्ले लेते हैं, जिससे गेंहू की अच्छी पैदावार होती है, लेकिन समय से पहले तेज पछुआ बयार चलने से गेंहू के पौधे कल्ले लेने के बजाय ऊपर की तरफ बढ़ कर बाली लेने लगे है।
वहीं गेंहू की जिन पौधों में बाली निकल आई है, उसको भी तेज पछुआ हवा से नुकसान पहुंच रहा है। क्योंकि गेहूं को पकने के लिए 120 से 130 दिन चाहिए। वहीं वातावरण में तापमान भी लगभग 20 से 25 डिग्री के आसपास रहे तो हालात ज्यादा अनुकूल साबित होते हैं, लेकिन समय से पहले तेज पछुआ हवा चलने के कारण पौधा जल्दी सूखने के साथ दानों में भी सिकुड़न आएगी। इससे दानों की वजनाई कम होने के साथ पैदावार पर भी बुरा असर पड़ेगा।
इसको लेकर किसान काफी चिंतित हैं। क्षेत्र के दिनमणि उपाध्याय, निर्मल, राम गोपाल उपाध्याय, बृजेश, विशंभर आदि किसानों का कहना है कि इस तेज हवा में यदि फसल सिंचाई की जाय तो फसल के गिरने की आशंका है, जिससे फसल उत्पादन में गिरावट का आकलन आ सकता है।
इसलिए ऐसी स्थिति में इस समय फसल को पर्याप्त नमीं मुहैया कराने के लिए तेज हवा के दौरान खेत में सिंचाई भी खतरे से कम नहीं है।