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जर्जर बांधों पर बढ़ा पानी का दबाव, सहमे ग्रामीण

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जर्जर बांधों पर बढ़ा पानी का दबाव, सहमे ग्रामीण
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राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के बढ़े जलस्तर से कई गांव हुए प्रभावित
विधायक श्यामधनी ने दोआब के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का किया दौरा
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर/बांसी। राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के बढ़े जलस्तर से कई गांवों प्रभावित हो गए हैं। बांसी क्षेत्र में राप्ती नदी और पहाड़ी नाले इन दिनों उफान पर है। नदी का बढ़ता जलस्तर और पानी का दबाव देख जर्जर बांध के किनारे बसे लोग सहमे हैं। सदर विधायक श्यामधनी राही ने दोआब क्षेत्र का दौरा किया और अधिकारियों को बाढ़ बचाव का निर्देश दिया।
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राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के बीच स्थित दोआब क्षेत्र के कई गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। यहां के तालभिरौना, धुसवा राजा, लक्षनपुर, डुमरिया, हरनी, इटौवा, गोनहा, संगलदीप आदि गांव पानी से चारो तरफ से घिरे हैं। यहां के कई प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पानी घुस गया है। वहीं दोनों नदियों के किनारे बने बांधों के बीच स्थित दोआब क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग बाढ़ के पानी का दबाव बढ़ने पर बांध के टूटने से तबाही मचने की आशंका से सहमे हैं। राप्ती नदी के तट पर बने बांसी-पनघटिया, सोनखर-हाटा, नरकटहा प्रोटक्शन, बांसी-डुमरियागंज, डुमरियागंज-बांसी सहित ककरही-गोनहा, असोगवा-नगवा बांध रैन कट और रैट होल से जर्जर है। यह बांध कई स्थानों पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। ऐसे में नदी और बांध के आसपास बसे लोग बाढ़ से भयभीत हैं। सिंचाई विभाग ने कुछ दिनों पूर्व बांसी-पनघटिया बांध का मरम्मत किमी तीन से 17 तक कराया था। ठेकेदार ने बांध पर थोड़ा बहुत मिट्टी डालकर ऊपरी सतह को सही कर दिया था परंतु लगातार हुई बारिश से इसकी पोल खुल गई। बांध में किमी पांच, छह, सात के पास बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। बांध पर ही किमी एक से तीन तक कोई काम नहीं कराया गया। हालत यह है कि किमी दो में बने दो बड़े-बड़े गड्ढे राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। ऐसा ही हाल नरकटहा प्रोटक्शन बांध का है तीन वर्ष पूर्व 2017 में आई बाढ़ में इस बांध पर कई जगह से बांध के जर्जर व रैट होल होने के कारण पानी का रिसाव हो रहा था। तब नरकटहा क्षेत्र के लोगों ने दिन-रात मशक्कत कर बांध को सुरक्षित किया था। बाढ़ हटने के बाद विभाग ने इसके मरम्मत व रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया। ऐसा ही कुछ हाल बांसी-डुमरियागंज और बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे बने असोगवा-नगवा एवं ककरही गोनहा बांध का है। क्षेत्र निवासी इंद्रजीत, रामकुमार, मो. असलम, भगवानदास, मोहनलाल, रामदास आदि का कहना है कि इन सभी बांध को शाही व चूहों ने अंदर से खोखला कर दिया है जिस पर ध्यान नहीं देकर विभाग ने बांध के ऊपरी सतह को ठीक करने का काम किया है। हालत यह है कि नदी का जलस्तर एवं पानी का दबाव बढ़ता देखकर तट पर बसे बगहवा कोमर, मड़हरवा, गूल्हरिया, मधुकरपुर, भगौतापुर, सोनखर, कदमवा, गूल्हरिया राजा, भवारी, भुजराई, हाटा, पकरडीहा, फूलपुर, तड़वल घाट, बकुआव, सूपा, बलुआ, भगौतापुर, डढिय़ा, सतवाढी, नवैला, करही, तारा, गुजरैलिया, तेलौरा घाट, जाल्हेखोर आदि गांव के लोग सहमे हैं।
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नदियों का जलस्तर (मीटर में)
नदी खतरे का स्तर सोमवार मंगलवार
बानगंगा 93.420 92.80 93.10
बूढ़ी राप्ती 85.650 85.470 85.520
राप्ती 84.900 84.610 84.590
जमुआर 84.89 82.600 82.85
तेलार 87.500 83.60 85.10
कूड़ा 83.520 82.440 82.680
घोघी 87.000 86.850 86.70
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