चेतरा माइनर में पानी न होने से सिंचाई प्रभावित
- आधा दर्जन से अधिक गांवों के किसान परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
खुनुवा। सरयू नहर परियोजना में दो स्थानों पर साइफन नहीं बनाने के कारण क्षेत्र की चेतरा माइनर बेकार हो गई है। माइनर में पानी नहीं जाने के कारण आधा दर्जन गांवों में करीब दो हजार एकड़ खेत की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
वर्ष 2021-22 में बनी सरयू नहर में साइफन या ह्यूम पाइप नहीं लगाने के कारण चेतरा माइनर में पानी नहीं जा रहा है। जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में खेतों की सिंचाई के लिए प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत जनवरी 1956 में बनी बानगंगा बैराज नहर प्रणाली से कुल 22 नहरें निकाली गई, जिनकी कुल लंबाई 147 किलोमीटर है। इसी बैराज से निकली चेतरा माइनर करहिया गांव के टोला फकीर डीह के पास होते हुए जमुआर नाले तक जाती हैं, लेकिन लापरवाही के चलते अब इसका अस्तित्व ही समाप्त होता दिख रहा है।
क्षेत्र के बगुलहवा, भादमुस्तहकम, डोहरिया, अठकोनियां, खुनुवां, रमवापुर तिवारी, बगहवा, गुजरौलिया, करहिया आदि गांवों में सिंचाई का एक मात्र स्रोत यहीं माइनर थी। क्षेत्र के किसान श्याम लाल यादव, करार अहमद, बाल गोविंद पटेल, पवन कुमार मिश्रा, प्रभु दयाल गुप्ता, प्रधान गंगाधर मिश्रा, जगन्नाथ मिश्रा, प्रभु पाल, बहरैची बाबा, प्रधान करम हुसैन लोगों ने जल्द चेतरा माइनर में पानी छोड़ने की मांग की है।
इस संबंध में बानगंगा नहर प्रणाली के जूनियर इंजीनियर अभिजीत सिंह ने बताया कि सरयू नहर चेतरा माइनर नहर को दो जगह पर क्रास कर रही है। उन जगहों पर साइफन नहीं लग पाया है, इस वजह से दिक्कत हो रही है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा।