गर्मी से एकाएक जलस्तर में हो रही गिरावट, बढ़ गई है पानी की किल्लत
नगर पालिका की ओर से सुबह और शाम को दो बार दी जाती है सप्लाई
पानी के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर शहरवासी झेल रहे है सांसत
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। लगातार तेज धूप के चलते बढ़ती गर्मी के साथ जलस्तर में गिरावट से शहर के चार मोहल्लों में 80 फीट से ऊपर लगे हैंडपंप सूखने लगे हैं। यहां लोगों के घर में लगे मोटर व समरसेबल से भी कम पानी आ रहा है। वहीं नगर पालिका की तरफ से सिर्फ सुबह-शाम को ही वाटर सप्लाई दी जा रही है। जिस कारण पानी के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर लोगों को स्नान व शौच करने, कपड़े साफ करने और बर्तन धुलने के लिए सांसत झेलनी पड़ रही है। बुधवार को शहर के विभिन्न मोहल्लों की पड़ताल में यह हकीकत सामने आया।
शहर के शास्त्रीनगर मोहल्ला के वन विभाग कॉलोनी निवासी ओमप्रकाश के घर लगा हैंडपंप सूख गया है, इसमें लगे मोटर से भी पानी नहीं निकल रहा है। उनका कहना है कि हैंडपंप सूखने के कारण सुबह और शाम को नगर पालिका से मिलने वाले वाटर सप्लाई पर ही निर्भर रहते हैं। वहीं सिविल लाइन निवासी मनोज कुमार ने बताया कि गर्मी के मौसम में मई व जून में उनके घर लगा हैंडपंप सूख जाता है, लेकिन अबकी बार अप्रैल में ही सूखने लगा है। हैंडपंप से पानी निकलने की जगह झटका लग रहा है। जिससे पानी तो निकलता नहीं है, बल्कि हाथ में चोट लगने का खतरा रहता है। आजादनगर मोहल्ला निवासी शमसुद्दीन कहते है कि गर्मी मौसम में मोहल्ले के कई हैंडपंप सूख जाते है। जिन घरों में 80 से सौ फीट गहराई तक हैंडपंप लगे है, उनमें अभी से पानी निकलना बंद हो गया है।
पानी प्लांट और समरसेबल से भी गिर रहा जलस्तर
शहर में 14 से अधिक स्थानों पर 400 फीट गहराई में बोरिंग कर स्थापित पानी प्लांट और 1000 से अधिक घर में तीन सौ फीट गहराई तक लगे समरसेबल से भी कई मोहल्लों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। इन मोहल्लों के घर में 100 फीट गहराई तक लगे हैंडपंप सूखने से लोगों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है। जलस्रोत विशेषज्ञ कहते है कि अधिक गहराई तक स्थापित किए पानी प्लांट और समरसेबल से जलस्तर नीचे चला जाता है, जिससे आसपास के हैंडपंप बेपानी हो जाते हैं।
बढ़नी, शोहरतगढ़ और बर्डपुर में नीचे रहता है जलस्तर
जिले के तराई बेल्ट बढ़नी, शोहरतगढ़ व बर्डपुर क्षेत्र में पिछले 10 वर्ष से ही जलस्तर नीचे रहता है। इन क्षेत्रों में कस्बा समेत कई गांवों में जल संकट की स्थिति रहती है। जबकि इन क्षेत्रों में बेहतर जलस्रोत की सुविधा रहने के कारण अधिक पानी की जरूरत वाले कालानमक धान उत्पादन का क्षेत्र माना जाता है। शोहरतगढ़ कस्बा निवासी राकेश कहते है कि वर्तमान में यहां के कई घर में 120 फीट गहराई तक लगे हैंडपंप सूखने लगे है। जिससे यहां के लोग पानी की किल्लत से परेशान है।
अभी और बढ़ेगा जलसंकट
मौसम विभाग के अनुसार, इस बार तेज धूप के साथ गर्मी बढ़ेगी, जिसका असर मई, जून और जुलाई तक रहेगा। देर से बारिश शुरू होने के कारण इस बार शहर समेत आसपास के गांवों में जलसंकट बढ़ने की संभावना है। जलनिगम के एई महेश प्रसाद बताते है कि बारिश कम होने और लगातार तेज धूप होने से जलस्तर में गिरावट होती है। अगर लगातार कई दिनों तक तेज धूप रही और बारिश नहीं हुई तो जिले में कुछ स्थानों पर जलस्तर नीचे चला जाएगा।
काशीराम में गहराया पानी का संकट
पहले से ही पानी की किल्लत से जूझ रहे शहर के काशीराम आवास के निवासियों की दिक्कत बढ़ने लगी है। यहां स्थापित सरकारी हैंडपंप पहले से ही खराब पड़े हैं, जबकि कुछ फ्लैट में लगे निजी हैंडपंप भी सूख गए हैं। यहां के लोग नगर पालिका की तरफ से सुबह-शाम मिलने वाले वाटर सप्लाई पर ही निर्भर हैं। काशीराम निवासी शमरूनिसा व सुभाष कहते है कि पानी की किल्लत से यहां के लोगों को बहुत सांसत झेलनी पड़ती है। पेयजल मिलना और भी मुश्किल होता है।
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मोहल्ले में 80 से सौ फीट गहराई तक के हैंडपंप सूख गए हैं। इससे लोगों को दैनिक क्रिया के लिए जरूरी पानी नहीं होने से बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
-राजकुमार, वाल्मिकीनगर
नगर पालिका की तरफ से सुबह-शाम वाटर सप्लाई मिल रही है, लेकिन स्नान के साथ कपड़े व बर्तन धुलने के लिए निजी हैंडपंप का सहारा रहता है, जो पानी नहीं उगल रहा है।
-गीता देवी, शास्त्रीनगर
जल संरक्षण की है जरूरत
जलस्रोतों के साथ ही बारिश के पानी का भी संरक्षण जरूरी है। जल संरक्षण नहीं होने से ही जलस्तर में गिरावट हो रही है। लोगों के जागरूक होकर जल संरक्षण करने से ही जल संकट से बचा जा सकता है।
-मदनराम पाल, अधिशासी अभियंता, जल निगम