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Siddharthnagar News: गेहूं के साथ जले किसानों के अरमान... बटाई और शादी पर संकट

Thu, 18 Apr 2024 01:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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आग से भोजन पर भी संकट बेटे की शादी निपटाने, कर्जा देने के लिए मायूस हुए किसान
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संवाद न्यूज एजेंसी

घोसियारी। शिवनगर डिड़ई थाना क्षेत्र के गजहड़ा से लगी आग ने किसानों के सामने खाद्य संकट पैदा कर दिया है। किसी के घर बेटे की शादी तो किसी को बटाई पर देने के लिए कुछ नहीं बचा। इस अगलगी से उनकी छह माह की मेहनत और उनके परिवार चलाने पर भी संकट खड़ा हो गया है। कैसे बेटे की शादी होगी और कैसे बटाई का अनाज देंगे, आगे की खेती कैसे होगी यह सोचकर पीड़ित परिवार परेशान है।

थाना क्षेत्र के गजहड़ा में मंगलवार दोपहर लगी आग से परसौना, सरैनिया बरैनिया के किसानों का गेहूं के साथ ही उनका अरमान भी उसी के साथ जल गया। इसी के साथ रिउना गांव के दो रिहायशी छप्पर भी जलकर नष्ट हो गए। परसौना गांव निवासी चंद्रावती ने तीन बीघा खेत बटाई पर लिया था, बुधवार सुबह वह खेतों में गेहूं की जली बाली सहेजते हुए मिली। पूछने पर बताया कि जो भी गेहूं बोया था। सब जल गया, अब इसी से कुछ दिन काम चलेगा खाने के लिए घर में एक दाना भी नहीं बचा है। आप खेत मालिक को कहां से दूंगी रिउना निवासी तारा देवी की रिहायशी झोपड़ी भी इस आग में जल गई। उनके पति की मृत्यु छह माह पूर्व हुई है। बेटे की शादी मई में है और एक बेटी की शादी भी उन्हें करनी है। इनके पास खेती की कोई जमीन नहीं है। अभी वह पति के सदमे से बाहर ही निकली थी कि एक और आफत उनके सामने आ गई।
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गांव के पास पड़ोस के लोग उन्हें खाने के लिए मदद कर रहे हैं। छप्पर जल जाने से उनका रो-रोकर बुरा हाल है। इस महिला की अभी विधवा पेंशन नहीं लगी है। रिउना निवासी सरला देवी की भी रिहायशी झोपड़ी जलकर राख हो गई। एक साल से वह लकवा की बीमारी से पीड़ित हैं। वह और उनके देवर बिरजू भी बीमार हैं। पूरा परिवार बीमारी के चलते कर्ज से लदा हुआ है। सरला देवी रो-रोकर कहती हैं कि ईश्वर ने मुझे क्यों नहीं उठा लिया। कम से कम परिवार वालों को दवा तो नहीं करानी पड़ती। इसी प्रकार फसल गंवाने वाले अन्य किसानों की प्रतिक्रिया रही।
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