बूढ़ी राप्ती और राप्ती का जलस्तर बढ़ा, सहमे लोग
बिस्कोहर क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती और डुमरियागंज क्षेत्र में राप्ती कई स्थानोें पर कर रही कटान
अमर उजाला ब्यूरो
बिस्कोहर/डुमरियागंज। नेपाल में लगातार हो रही बारिश से पहाड़ी नदियों का पानी बूढ़ी राप्ती और राप्ती का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे नदी किनारे बसे गांवों के लोग दहशत में हैं।
बिस्कोहर प्रतिनिधि के अनुसार, बूढ़ी राप्ती के किनारे बसे दलपतपुर, डेगहर, परसोहन, देवीपुर, गदाखौवा, बुढ्ढी, छगडिहवा, मुडिलिया, बेलभारिया, लमुईया, इमिलिया, नवडिहवा आदि गांवों में बूढ़ी राप्ती नदी कहर बनकर टूटती है। बुधवार को बूढ़ी राप्ती नदी के जलस्तर बढ़ने की सूचना पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय परसोहन घाट पहुंचे और ग्रामीणों से मिलकर नदी के स्थिति की जानकारी ली। जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। नदी के पास बने दलपतपुर-परसोहन बांध का निरीक्षण भी किया। इस दौरान देवेन्द्र प्रताप सिंह, सुरेश पांडेय, महेंद्र यादव, राम बनारस पांडेय, मस्ताना यादव आदि मौजूद रहे।
डुमरियागंज प्रतिनिधि के अनुसार, तहसील क्षेत्र के वामदेई और रमवापुर उर्फ नेबुआ गांव के लोग राप्ती के बढ़ते जलस्तर और कटान से सहमे हुए हैं। वामदेई में कटान मात्र 40 मीटर दूर हो रहा है, वहीं रमवापुर उर्फ नेबुआ गांव के बंधे से चंद मीटर की ही दूरी पर नदी बहने लगी है। कटान से अब तक दोनों गांवों के करीब 50 बीघा खेत नदी में समा चुके हैं। क्षेत्र के बेतनार, असनहरा माफी और बगहवां गांव में भी नदी कटान कर रही है।
ग्राम प्रधान वामदेई बृजेश उर्फ बब्लू पांडेय, रामफेर पांडेय, परमेश्वर, बरसाती, रामतेज पांडेय, अंगद देव और नेबुआ गांव के ग्राम प्रधान जगदंबा श्रीवास्तव, रामबहादुर श्रीवास्तव, तज्जमुल, नसीबदार, राजेन्द्र आदि ने बताया कि रात में नदी में कटान की आवाज सुनकर वे सहम जाते हैं। प्रशासन द्वारा अभी तक कटान की रोकथाम के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। असनहरा माफी गांव के अलाउद्दीन व डॉ. नूरूद्दीन ने बताया कि गागापुर में तो राप्ती नदी का पानी शाहपुर-सिंगारजोत सड़क के बराबर होने के करीब पहुंच गया है। अगर नदी का जलस्तर और बढ़ा तो सड़क से आवागमन बंद हो जाएगा। बेंवा मुस्कहम गांव निवासी रामकुमार उर्फ ककनू यादव ने बताया कि जल्द इंतजाम नहीं हुए तो कटान वाले गांव का अधिकांश हिस्सा कटकर नदी में विलय हो जाएगा। डमरियागंज एसडीएम राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि वे टीम के साथ वामदेई, बेतनार, असनहरा माफी, जूड़ीकुईयां और अमहवां आदि गांव में जाकर कटान का निरीक्षण करवाया गया है। यहां कटान तो है। मगर बाढ़ की स्थिति नहीं है। बाढ़ से निपटने की पूरी तैयारी है।
डुमरियागंज : सात बाढ़ राहत केंद्र बनाए गए
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र में राप्ती के कहर से लोगों को बचाने और सुरक्षित स्थान पर रखने को लेकर तहसील प्रशासन द्वारा इस साल सात बाढ़ राहत केन्द्र (तरहर स्थित साधन सहकारी समिति, विशुनपुर हरि गांव में स्थित संत मौनीदास इंटर कॉलेज, शाहपुर, सिरसिया, जूड़ीकुईयां, बेतनार, रूद्रौलिया बुजुर्ग) बनाए गए हैं। तहसीलदार शिवमूर्ति सिंह ने बताया कि पिछले साल बाढ़ की विभीषिका देखते हुए बाढ़ग्रस्त ग्रामों के प्रधानों से एक-एक नाव खरीदने को कहा गया था। लगभग सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक नाव आ गई है। वहीं विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा भी बाढग़्रस्त इलाकों की मदद के लिए नाव खरीदकर दी गई थी। बाढ़ आने पर आवश्यकतानुसार नाव व स्टीमर की और व्यवस्था करवाई जाएगी।