खाद्य पदार्थों की बर्बादी रोकना जरूरी : डॉ. दीप्ति
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग की ओर से शनिवार को विश्व खाद्य दिवस के मौके पर आयोजित संगोष्ठी में सहायक आचार्य डॉ. दीप्ति गिरी ने कहा कि खाद्य पदार्थों की बर्बादी रोकना जरूरी है। विश्व खाद्य दिवस प्रत्येक वर्ष 16 अक्तूबर को मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त वर्ल्ड फूड प्रोग्राम और अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष की ओ से भी इसे व्यापक रूप से मनाया जाता है।
डॉ. गिरी ने कहा कि हमें खाद्य संरक्षण के नए तरीके जानने की आवश्यकता है। जो फल और सब्जियां हम सूखने पर फेंक देते हैं, सूखने से पहले उनका उपयोग करके खाद्य संरक्षण किया जा सकता है।
लोक प्रशासन विभाग की सह आचार्य डॉ सुनीता त्रिपाठी ने कहा कि खाद्य पदार्थों की बर्बादी रोकने के लिए उपाय करना चाहिए। उन्होंने खाद्य पदार्थों के बेहतर उपयोग के तरीके बताएं।विज्ञान संकाय की सह अधिष्ठाता प्रो. प्रकृति राय ने कहा कि घरेलू एवं सामाजिक स्तर पर किस तरह खाद्य को व्यर्थ होने से बचाया जा सकता है।
अधिष्ठाता कला संकाय डॉ हरीश कुमार शर्मा ने कहा कि खाद्य उपलब्धता एक वैश्विक संकट के रूप में उभर रहा है और इसे कम करने के लिए सभी को प्रतिबद्ध होना जरूरी है। बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा शकीला खान ने भी खाद्य दिवस पर अपने विचारों को साझा किया द्य उसने बताया कि वैश्विक स्तर पर भुखमरी में वर्तमान समय में भारत 107 में स्थान पर है।
इस परिस्थिति से उबरने के लिए भारत सरकार एवं अन्य राज्य स्तर पर योजनाएं लागू की गई हैं। इसमें भारत सरकार की अंत्योदय योजना, पोषण योजना उल्लेखनीय है । इस मौके पर छात्राओं ने पोस्टर प्रतियोगिता में खाद्य संरक्षण का संदेश दिया। डॉ. नीता यादव, डॉ रेनू त्रिपाठी, डॉ सरिता सिंह, डॉ आभा द्विवेदी, डॉ वंदना गुप्ता, डॉ मनीषा, डॉ विनीता, डॉ किरण गुप्ता, डॉ अंकिता श्रीवास्तव, डॉ. अविनाश प्रताप सिंह मौजूद थे।