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लंच पैकेट मिला न राहत सामग्री, कैसे बुझे पेट की आग

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बाढ़ के पानी के कारण नकाही गांव के लोग बंधे पर लिए शरण। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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लंच पैकेट मिला न राहत सामग्री, कैसे बुझे पेट की आग
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बिस्कोहर/कठेला। बूढ़ी राप्ती नदी के कारण आई बाढ़ का कहर झेल रहे बाढ़ पीड़ितों को सातवें दिन भी तहसील प्रशासन की ओर से राहत सामग्री का वितरण नहीं किया जा सका है। न तो लंच पैकेट मिल रहा है न ही राहत सामग्री। ऐसे में पेट की आग कैसे बूझे, यह समझ सकते हैं। बाढ़ प्रभावित इलाके के लोग राहत के लिए दर-दर भटकने को विवश हैं। पीड़ित परिवार तहसील प्रशासन से मदद की आस में सातवें दिन भी इंतजार करते रहे।
इटवा तहसील क्षेत्र के राजस्व ग्राम पंचायत भैसाही जंगल सहित टोला चेचराफ बुजुर्ग, अनरियाडीह, पूर्वडीह, पश्चिमडीह और ग्राम पंचायत खखरा सहित पिपरहवा, अमहिया भारी, बैरिया खालसा, केवटलियाडीह आदि गांव बूढ़ी राप्ती की बाढ़ से एक सप्ताह से चारों तरफ से पानी से घिर चुके हैं। गांवो में रहने वालो के घर में बाढ़ का पानी भर गया है। बाढ़ से घरों में रखा राशन पानी सब बाढ़ के पानी में डूब चुका है। इन गांवो में रहने वाले लोग घरों के छत व गांव के ऊंचे स्थलो पर डेरा दिया है। बाढ़ का कहर झेल रहे करीब पांच हजार बाढ़ पीड़ितो को सातवें दिन भी तहसील प्रशासन की ओर से राहत सामग्री का वितरण नहीं किया गया है और न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी ही इन गांवो में गया है। पीड़ित परिवार तहसील प्रशासन से मदद की आस में सातवें दिन भी इंतजार करते रहे।
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ग्राम पंचायत खखरा के प्रधान श्रीराम यादव ने बताया कि बाढ़ का पानी रविवार को सिवान में लगे फसलों को डुबाते हुए गांव में घुस गया था, जिससे गांवो में रहने वाले लोगों के घरों में पानी भर गया। राशन पानी सब पानी में डूब गया था मैंने मंगलवार को तहसील प्रशासन से बाढ़ विभीषिका के विषय में बताया और नाव के साथ राहत की मांग की। राहत तो नहीं मिली, परंतु बुधवार-बृहस्पतिवार को एक-एक नाव मिल गई, जो नाकाफी थी।
पीड़ित ग्रामीण पियारे, ओराज, गुलाब, निब्बर, लौटू यादव, शिव कुमार, घमालू व धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि करीब एक सप्ताह से हम लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए है। घर में पानी भरने से राशन डूब गया है। प्रशासन की तरफ से सिर्फ दो नावें भेजी गई हैं। कुछ सहायता ग्राम प्रधान से मिल जाती है। बाकी नाव से हम लोग पास के परसा चौराहा पर जाकर परिचित दुकानों से ले आते हैं। यही हाल राजस्व ग्राम भैसाही जंगल का है।
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गांव के प्रधान के प्रतिनिधि नसीबुल ने बताया कि गांव व गांव के पांचों पुरवों में पानी भरा है। ग्रामीण छत व ऊंचे स्थानों पर रात गुजार रहे हैं। प्रशासन की तरफ से दो नावें मिली हैं, जो आबादी के हिसाब से कम हैं। तीन दिन से लेखपाल खाली हाथ गांव में आते हैं और चले जाते हैं। प्रशासन की तरफ से न कोई सहायता मिली है और न ही डॉक्टर की टीम गांव में आई है। करीब सात दिन के बाद राहत के नाम पर आज सांसद जगदंबिका पाल की तरफ से भुजा, पूड़ी व सब्जी हर व्यक्ति को दी गई है।
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