बोले ग्रामीण, बच्चों और पशुओं के बचाने के लिए पूरी रात समूह बनाकर करते रहे रखवाली
चार लोगों पर हमले के बाद खौफ में हैं ग्रामीण, बच्चों को नहीं भेजा विद्यालय
उसका थाना क्षेत्र के केवटलिया गांव का है मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर/जोगिया। उसका थाना क्षेत्र के केवटलिया गांव में जंगली जानवर के हमले में चार लोगों के घायल होने के बाद ग्रामीण दहशत में हैं। सोमवार पूरी रात लोग समूह बनाकर घरों के पास बैठे रहे। बच्चों और पशुओं की रखवाली में जागते हुए उनकी रात कटी।
ग्रामीण वन विभाग के प्रति आक्रोशित थे। उनका कहना था कि जंगली जानवर गांव के चार लोगों को जख्मी कर चुका है। इसके बाद भी वनकर्मी पिंजरा लगाकर आठ बजे रात में चले गए। सुबह होने के बाद गांव में पहुंचे। गांव के लोग अनहोनी से डरे हुए हैं। मंगलवार शाम तक जंगली जानवर न तो दिखा और न ही वनकर्मी उसे पकड़ सके।
क्षेत्र के केवटलिया गांव में सोमवार सुबह खेत में काम कर रहे किसानों पर एक जंगली जानवर ने एक-एक करके हमला करके चार लोगों को लहूलुहान कर दिया। सभी को जोगिया सीएचसी पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज हुआ। मामले की जानकारी मिलने के बाद वनकर्मी दिनभर ढूंढे, लेकिन हमला करने वाले जानवर को पकड़ नहीं सके।
मंगलवार सुबह गांव के लोगों की स्थिति जानने के लिए जब पहुंचे तो जहां-तहां लोग समूह बनाकर बैठे थे। रतजगा करने से सभी की आंखें चढ़ी थीं और वन विभाग के प्रति लोगों में आक्रोश था। गेल्हई ने कहा कि वनकर्मी हम लोगों को मरने के लिए छोड़कर चले गए। पिंजरा लगाकर वे लोग रात में आठ बजे ही चले गए थे।
बच्चों और पशुओं को बचाने के लिए जान की बाजी लगाकर पूरी रात लोग समूह में बैठे मिले। आगे बढ़े तो गांव में जगह-जगह लोगों की टोलियां लाठी और डंडे लेकर बैठी थी। महिलाएं और बच्चे घरों में कैद थे। लोगों को डर था कि कब कहां से आकर जानवर हमला कर दे।
वनकर्मी सुबह पहुंचे तो उन्हें देखकर लोग आक्रोशित हो गए, लेकिन किसी ने कुछ बोला नहीं। जिस केले के खेत की ओर जानवर गया था, उधर जाने से लोग डर रहे हैं। हालांकि, ग्रामीण पूरी तरह से मुस्तैद हैं।
बोले ग्रामीण
जंगली जानवर के डर से गांव के लोग परेशान हैं। रात के समय लोग अपने घर से बाहर नहीं आए। किसी तरह रात गुजरी है। अब भी हमले को लेकर डर बना है।
-हरिश्चंद्र
रात में गांव के लोग बहुत भयभीत थे और वन विभाग की टीम रात आठ बजे चली गई। उन्होंने यह नही सोचा कि ग्रामीणों का क्या हाल होगा। कोई भी आलाधिकारी दूसरे दिन भी गांव में नहीं आया।
-ओमप्रकाश
जहां पर मेरा घर है, वहीं पर जानवर आया था। हम लोग रात को अपना घर छोड़कर चले गए थे। मन में डर सा है। वन विभाग की टीम अभी जानवर को नहीं पकड़ पाई है। आज रात कैसे कटेगी, डर सता रहा है।
-राज कुमार
हम अपने बच्चों को को लेकर घर से बाहर नहीं निकल पाए हैं। वन विभाग की टीम शाम को ही चली गई थी। रात में लोग बहुत भयभीत थे। छोटा-छोटा समूह बनाकर लोग रातभर घूमते रहे।
-हजारी
डर की वजह विद्यालय नहीं गए बच्चे
प्राथमिक विद्यालय केवटलिया जहां हर दिन बच्चों से गुलजार रहता था। वहां मंगलवार को एक भी बच्चा विद्यालय में नहीं था। शिक्षक ने बताया कि गांव में कोई जानवर आ गया है। इसलिए आज विद्यालय में कोई बच्चा नहीं है। हालांकि, सभी शिक्षक विद्यालय में मौजूद रहे।
सांसद प्रतिनिधि
वन विभाग की बड़ी लापरवाही है। ग्रामीणों को छोड़कर वे चले गए। दूसरे दिन सुबह एक पीआरडी जवान ही था। इस बारे में डीएफओ से बात करके तत्काल फोर्स भेजने और जंगली जानवर को पकड़ने के लिए बात की है।
-रवि जायसवाल, सांसद प्रतिनिधि जोगिया
कोट
वन विभाग की टीम पूरे दिन हमला करने वाले जानवर को पकड़ने के लिए लगी हुई थी। रात में भी वन विभाग की टीम थी। ग्रामीण गलत बता रहे हैं कि वनकर्मी गांव में नहीं थे।
-पुष्प कुमार कंदल, डीएफओ