- बांसी तहसील के लोधपुरवा, सिकटा और मध्यनगर गांव का मामला, ग्रामीण आंदोलनरत
- एक्सप्रेसवे के बगल इंडस्ट्रियल काॅरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण की चर्चा से परेशान हैं ग्रामीण
बांसी। इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए अपनी भूमि अधिग्रहीत होने की आशंका से परेशान लोधपुरवा, सिकटा और मध्यनगर के ग्रामीण सहमे हुए हैं। बांसी तहसील में एनएच-28 के बगल में स्थित लोधपुरवा, सिकटा और मध्यनगर के लोग बीते 15 दिनों से अधिकारियों और राजस्वकर्मियों की गांव में आवागमन से आशंकित हैं। उनका कहना है कि इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण में उनकी जमीन चली गई तो वह भूमिहीन हो जाएंगे। इससे उनके सामने भुखमरी का संकट उत्पन्न हो जाएगा। वहीं, तहसील प्रशासन इन गांवों में भूमि अधिग्रहण संबंधी किसी भी कार्रवाई से साफ इन्कार कर रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब 15 दिन से इन गांवों में एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार का लगातार आना-जाना हो रहा था। बुधवार को नायब तहसीलदार महबूब आलम चकबंदी विभाग के लेखपाल मोहन और कानूनगो रविंद्र सिंह को लेकर गांव पर पहुंच गए इसके बाद एसडीएम निखिल चक्रवर्ती भी वहां पहुंचे। यह देख किसानों को उनकी भूमि अधिग्रहीत किए जाने की आशंका को बल मिल गया। फिर क्या था आसपास के गांव में भूमि अधिग्रहण किए जाने की अफवाह जंगल की आग की तरह फैल गई। इसके बाद ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विनोद कुमार चौधरी के ग्रामीणों ने एसडीएम से मिलकर अपनी फरियाद की और बताया कि वह सीमांत किसान है। उनके जीवकोपार्जन का यही साधन है खेत का अधिग्रहण हो जाने के बाद वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे। इसके बाद अपने खेत को अधिग्रहण से बचाने को लेकर काफी संख्या में महिलाएं और पुरुषों ने इकट्ठा होकर एनएच-28 से सटे किलकिल रोड पर प्रदर्शन किया था।
कानूनगो चकबंदी रविंद्र सिंह का कहना है कि हम और हल्का लेखपाल पैमाइश करने नहीं गए थे। नायब तहसीलदार महबूब आलम के बुलाने पर हम लोग दस्तावेज लेकर गए थे।
गांव में 15 दिन से अधिकारियों का लगातार आगमन हो रहा है। जानकारी मिली थी कि बगल से निकलने वाले गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के पास इंडस्ट्रियल काॅरिडोर के लिए आसपास के गांव की एक हजार एकड़ भूमि प्रदेश सरकार अधिग्रहण करना चाहती है।
- विनोद कुमार चौधरी, सिकटा
हम सब छोटे किसान है। मेरे पास कुल ढाई बीघा खेत है वह भी अधिग्रहण हो जाने पर बर्बाद हो जाएंगे। हमारे पास सिर्फ यही जीवकोपार्जन का साधन है। यह चले जाने से उनके सामने भुखमरी की स्थित उत्पन्न हो जाएगी।
- चंद्रबली प्रजापति, सिकटा
मेरे पास सिर्फ तीन बीघा खेत है। यह सूचना मिली है कि खेत का अधिग्रहण हो रहा है। खेत अधिग्रहीत हो जाने के बाद वह क्या करेंगे। पूरी जिंदगी खेती किसानी की। खेत जाने के बाद वह क्या करेंगे, समझ नहीं आ रहा।
सदानंद चौधरी, किसान सिकटा
भूमि अधिग्रहण की चर्चा पूरे गांव में हो रही है। इसको लेकर पूरे क्षेत्र के किसान परेशान है। इनका कहना है कि हम सब छोटे किसान हैं। हमारे पास तीन बीघा खेत है। यह भी चला जाएगा तो हम क्या करेंगे।
- इंद्रजीत, किसान सिकटा
भूमि अधिग्रहण किए जाने का कोई मामला नहीं है। वहां के किसानों को पूरी तरह से आश्वस्त किया जा चुका है कि किसी तरह का कोई भूमि अधिग्रहण नहीं होना है।
- निखिल चक्रवर्ती, एसडीएम, बांसी