- जिले में 168 चिकित्सकों के सीएचसी और पीएचसी पर है पद
- मौजूदा समय में 109 चिकित्सक कर रहे 12 सीएचसी और 60 से अधिक पीएचसी ड्यूटी
- 34 चिकित्सक ऐसे जिनकी पोर्टल पर लखनऊ में दिखती है तैनाती, जिले में कभी ज्वाइन ही नहीं किए
- विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण निजी अस्पताल से दवा कराने को विवश हैं मरीज
- कई बार इनके चक्कर में पड़कर चली जाती है मरीजों की जान
- ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दवा हो रहा खोखला
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले के बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का दावा बेदम साबित हो रहा है। सीएचसी और पीएचसी बालरोग, हड्डी रोग और महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। ऐसे में इलाज के लिए जाने वाले मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है। डॉक्टरों की कमी की स्थिति यह है कि जिले में 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है और दो ब्लॉक स्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 60 अन्य पीएचसी संचालित हो रहा है। लेकिन यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ ही चिकित्सकों के पदों की काफी कमी है।
ग्रामीण क्षेत्र की लगभग 20 लाख की आबादी को घर के नजदीक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए बने इन अस्पतालों में लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर चिकित्सक रहें और सुविधा मिले तो क्यों निजी अस्पताल पर इलाज कराने के लिए कोई क्यों जाए। जिले के चार सीएचसी की पड़ताल करके चिकित्सकों के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि कई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं।
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विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव रेफर हो रहे मरीज
भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र का इकलौता सीएचसी सिरसिया में विशेषज्ञ डाक्टरों का अभाव है। करीब ढाई लाख की आबादी वाले इस सीएचसी पर प्रतिदिन 100 से 150 मरीज इलाज कराने आते हैं। इस अस्पताल पर डॉक्टरों के छह पद हैं। लेकिन तैनात केवल दो सामान्य एमबीबीएस डाक्टर हैं। सीएचसी सिरसिया में विभाग के द्वारा आंख, स्त्री प्रसूत रोग, हड्डी रोग व बाल रोग विशेषज्ञ के साथ ही दो सामान्य एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती होनी है। लेकिन सीएचसी सिरसिया में केवल दो सामान्य एमबीबीएस डॉक्टरों की ही तैनाती है। बाकी स्त्री प्रसूत रोग, बाल रोगएहड्डी व आंख के डॉक्टरों का पद खाली है। ऐसे में डॉक्टरों की ओर से मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
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तीन की जगह एक फार्मासिस्ट उनकी भी लगी चुनाव में ड्यूटी
सीएचसी सिरसिया में डॉक्टरों के साथ फार्मासिस्ट का भी अभाव है। तीन फार्मासिस्ट का पद सृजित है। मगर तैनाती केवल एक फार्मासिस्ट का है। सीएचसी सिरसिया में तैनात इकलौते फार्मासिस्ट का भी चुनाव में ड्यूटी लगा दी गई है। ऐसे में 24 घंटे इमरजेंसी चलने वाले इस अस्पताल में आने वाले मरीजों के स्वास्थ्य का जिम्मा राम भरोसे है।
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विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेवां भी चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। इसलिए बड़ी आबादी को इलाज के लिए निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। रिपोर्ट सीएचसी पर भी हड्डी, नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञों के साथ ही आंख के डॉक्टर नहीं है। एक स्त्री प्रसूत रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। प्रतिदिन इलाज के लिए करीब 250 मरीज आते है। जिन्हें हड्डी, आंख के साथ ही नाक कान, गला रोग की समस्या होती है उन्हे बस्ती के लिए रेफर किया जाता है। सात पद के सापेक्ष एक की तैनाती है।
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हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं
लगभग साढ़े तीन लाख की आबादी के बीच शोहरतगढ़ में एक सीएचसी है। लेकिन, अर्से से हड्डी रोग चिकित्सक की ओपीडी खाली है। वर्तमान समय में यहां प्रतिदिन दो अस्पतालों पर 300 से 350 मरीज इलाज के लिए आते हैं। सीएचसी पर बालरोग विशेषज्ञ हैं। बेहोशी के चिकित्सक हैं। महिला रोग विशेषज्ञ में पुरुष चिकित्सक तैनात हैं। मेडिसिन के चिकित्सक नहीं है। चर्म रोग के चिकित्सक नहीं है। इससे अस्पताल पर हड्डी रोग, चर्मरोग सहित अन्य बीमारी के शिकार लोगों जिला अस्पताल या फिर निजी अस्पताल में इलाज के लिए जाना पड़ता है।
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चिकित्सकों की संख्या से जुड़ी रिपोर्ट
आंकड़ों के मुताबिक जिले में सीएचसी और पीएचसी पर डॉक्टरों के 168 पद विभाग के रिकार्ड के मुताबिक है। मौजूदा समय में 109 कार्यरत हैं। जबकि 16 पीजी की पढ़ाई के लिए चले गए हैं। वहीं, नौ डॉक्टर ऐसे हैं जो बिना बताए दो साल से लापता हैं औैर विभाग की ओर उन्हें नोटिस देने के साथ ही वेतन भी रोक रखा है। जबकि 34 डॉक्टर शासन के पोर्टल पर सिद्धार्थनगर में तैनात हैं। लेकिन यहां कभी ज्वाइनिंग ही नहीं किए। विभाग को उनके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है।
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कमजोर स्वास्थ्य का ढांचा, मरीज गवां रहे जान
जिले में सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर न होने के कारण मरीजों को भुगतान पड़ रहा है। सीएचसी पर प्रसव की व्यवस्था न होने की वजह से प्राइवेट में गर्भवती पहुंच रही हैं, जहां आर्थिक शोषण के साथ ही जच्चा और बच्चा दोनों की जान चली जा रही है। जैसा की लोटन, उसका, शोहरतगढ़, डुमरियागंज, सदर ब्लॉक क्षेत्र में निजी अस्पतालों में सामने आ चुकी है। अगर स्वास्थ्य का ढांचा मजबूत होता तो शायद इनकी जान नहीं जाती है।
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इतने की होनी चाहिए तैनात
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक एक सीएचसी पर सात चिकित्सक की तैनाती अनिवार्य है। इसमें स्त्री रोग, बालरोग, सर्जन, बेहोशी के और तीन एमबीबीएस की तैनाती हर हाल में होनी चाहिए।
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अस्पताल कहने के लिए है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती नहीं है, इसलिए इलाज में बहुत परेशानी होती है। केवल बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने की बात तो होती है, लेकिन चिकित्सक ही नहीं रहेंगे तो इलाज कैसे होगा।
नंद किशोर मिश्र, निवासी बिजवार बढई
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क्षेत्र किसी महिला या सड़क दुर्घटना में घायल को सीएचसी सिरसिया लाने पर रेफर किया जाता है। किसी बच्चे को गंभीर स्थिति में इस अस्पताल पर लाने के दौरान बिना इलाज रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में लोगों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
-मनोज मिश्र, निवासी मन्नीजोत
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डॉक्टरों के खाली पदों पर तैनाती के लिए पत्राचार किया गया है। चिकित्सक मिलते ही तैनात किया जाएगा। रही बात गायब चिकित्सक के बारे में नौ लोग हैं, जिन्हें नोटिस भी दिया गया है। जो संसाधन हैं, उसमें मरीजों का बेहतर इलाज करने संबंधित दिशा-निर्देश सभी को दिया गया है।
-डॉ. डीके चौधरी, सीएमओ