बोर्ड परीक्षा की समय सारिणी घोषित हो गई है। फरवरी माह से परीक्षाएं शुरू होनी है, मगर अधूरा कोर्स विद्यार्थियों के लिए मुसीबत बना हुआ है। दिसंबर माह बीतने को है, स्कूलों में 50 फीसदी कोर्स भी पूरा नहीं हो पाया है। आधी-अधूरी पढ़ाई के कारण बच्चे बोर्ड की परीक्षा कैसे देंगे, समझ नहीं पा रहे।
चुनावों के कारण इस वर्ष स्कूलों में पठन-पाठन बुरी तरह प्रभावित रहा है। नया शिक्षण सत्र शुरू होने के बाद से ही चुनावी सरगर्मी छाई हुई है। पहले बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव के कारण, फिर ग्राम प्रधान चुनाव के चलते दिसंबर का आधा माह बीत चुका है।
अब सर्दी के कारण पठन-पाठन प्रभावित है। इस बीच जारी परीक्षा कार्यक्रम के तहत 18 फरवरी से बोर्ड परीक्षा होनी है। इससे पहले 5 जनवरी से प्रायोगिक परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी। इसका असर भी पढ़ाई पर पड़ना तय है। ऐसे में शिक्षकों के सामने पाठ्यक्रम पूरा करने की चुनौती है।
बोर्ड परीक्षा शुरू होने में दो माह से भी कम समय बचा है। छात्र-छात्राओं का पाठ्यक्रम काफी पिछड़ा है। शिक्षकों के साथ-साथ छात्र-छात्राओं पर भी पाठ्यक्रम पूरा करने का खासा दबाव है। इस संबंध में डीआईओएस रामकृपाल प्रसाद का कहना है कि स्कूलों में कोर्स पूरा कराने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी।