सिद्धार्थनगर। गांव के गरीब परिवार की महिलाओं को धुंआ मुक्त ईंधन देने के मकसद से शुरू की गई केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की तलाश परेशानी बन गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय से जारी की गई पात्रों की सूची में कई ऐसे नाम हैं, जिनका कोई अता-पता नहीं है। गांव के लोगों को ही नहीं मालूम कि उनके पास-पड़ोस में संबंधित नाम-पते का व्यक्ति कहां और कब से है। ग्राम प्रधान लिस्ट लेकर ऐसे लाभार्थियों को ढूंढ रहे हैं। ताजा उदाहरण बर्डपुर ब्लाक का महादेवा कुर्मी गांव है।
बर्डपुर एचपी गैस एजेंसी से संबद्ध इस गांव में लाभार्थियों की सूची में गड़बड़ियों की भरमार है। किसी का नाम नहीं है तो कइयों के माता-पिता सहित अन्य विवरण ही नहीं है। ऐसे नामों के सामने एनयूएलएल (नुल) अंकित कर दिया है।
गांव के 588 लोगों की लिस्ट में करीब डेढ़ सौ से अधिक नाम ऐसे हैं, जिनके सामने एनयूएलएल अंकित है। काबिलेगौर यह है कि लिस्ट में टीन नंबर के आगे नाम व अन्य विवरण तो गायब है, मगर उम्र और लिंग का उल्लेख किया गया है। अब सवाल है कि जब नाम मालूम ही नहीं तो फिर सर्वे करने वालों ने लिंग और उम्र का निर्धारण कैसे कर लिया। बहरहाल, ग्राम प्रधान के लिए यह सूची सिरदर्द बनी हुई है।
पिछले एक पखवाड़े से वह गांव में घर-घर जाकर ऐसे लोगों को ढूंढ रहे हैं, जिनका नाम-पता नुल है। तमाम कोशिशों के बाद भी इन लोगों की पहचान नहीं हो पाई है। ग्राम प्रधान मो. शफीक का कहना है कि ग्राम पंचायत की मतदाता सूची, परिवार रजिस्टर सहित हर विवरण चेक कर लिया गया, मगर ऐसे नाम वाले पूरे गांव में कहीं नहीं हैं। जो लिस्ट मिली है, उनमें से एक भी नाम का व्यक्ति गांव में नहीं है।
उज्ज्वला योजना के तहत गांव के 16 लोगों ने आवेदन किया है, मगर इस लिस्ट में नाम न होने से उन्हें16 अंकों का कोड नहीं मिला है, जिससे वह वंचित हो रहे हैं। महादेवा कुर्मी गांव या बर्डपुर एजेंसी तो बस उदाहरण है, पूरे जिले में ऐसे दर्जनों मामले हैं। त्रुटियों से भरी लिस्ट लेकर प्रधान, बीडीसी व एजेंसी प्रबंधक माथा पच्ची कर रहे हैं, उधर जिम्मेदार योजना के लाभ गिना कर वाहवाही बटोरने में मशगूल हैं।