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Siddharthnagar News: नेपाल के रास्ते भारत लाया जा रहा तुर्की का मक्का

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एसएसबी की गिरफ्त में मक्का के साथ आरोपी। फाइल फोटो
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। नेपाल सीमा पर तस्करी का ट्रेंड मांग के अनुसार बदलता रहा है। इसकी वस्तु की मांग, तस्कर उसमें अपनी ऊर्जा लगा देते हैं। चाहे वह भारत से जाने वाले सामान हों या नेपाल के जरिये अन्य देशों से आने वाली वस्तु, जिसमें अधिक कमाई उसकी तस्करी शुरू। खुनुवां बाॅर्डर से रविवार को सुरक्षा एजेंसी के लोगों ने मक्का की बड़ी खेप बरामद की गई। मौके से 19 बोरी मक्का बरामद किया गया। इस बार के मक्के की तस्करी ने लोगों को चौंका दिया है।
नेपाल से आने वाला मक्का अमूमन ब्राजील को होता था। लेकिन, इस बार तुर्की का मक्का होना सामने आया है। मक्के की खेप की बरामदगी का होना माना जा रहा है कि अगर तुर्की से मक्का आ रहा है तो बड़ा रैकेट और बड़ी खेप उतारने की साजिश है। सूत्रों की मानें तो नेपाल डंपिंग सेंटर के रूप में प्रयोग हो रहा है।
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जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगती है। यहां प्रत्यक्ष और अप्रत्क्ष दो प्रकार से तस्करी होती है। सीमावर्ती इलाके के खुनुवां बाॅर्डर से एसएसबी के जवानों ने 19 बोरी तुर्की का मक्का पकड़ा। जब तस्करी के बारे में बाॅर्डर इलाके में जानकारी ली गई तो तस्करी का ट्रेंड सामने आया है। सूत्रों की मानें तो नेपाल बॉर्डर से सटे इलाकों में इन दिनों एक नई तस्करी चुपचाप पैर पसार रही है।
इस बार मामला हथियार या नशे का नहीं, बल्कि तुर्की से आयातित मक्के का है, जिसे नेपाल में डंप कर साइकिल, पैदल और छोटे वाहनों के जरिये भारत में खपाया जा रहा है।
पॉपकॉर्न, होटल और बेसन उद्योग की बढ़ती मांग ने इस मक्के को तस्करों के लिए सोने की फसल बनने की ओर है। नेपाल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक तुर्की का मक्का पहले समुद्री रास्ते से दक्षिण एशिया पहुंचता है और वहां से बड़े आयातकों के जरिए नेपाल में उतारा जाता है।
नेपाल में तो मक्का का उत्पादन होता है, लेकिन खाने को जो ट्रेंड है, उसी हिसाब से पूर्ति नहीं हो पाती है। इसलिए ब्राजील का मक्का आता है। लेकिन, भारत में अच्छा रेट मिलता है, इसलिए तस्करों के जरिए भारत में लाया जाता है। वहां से आने के बाद नेपाल में यह मक्का खुले बाजार और गोदामों में जमा कर लिया जाता है, जिसे बाद में सीमावर्ती जिलों में लाकर छोटी-छोटी खेपों में बांट दिया जाता है। रात के अंधेरे में साइकिल, ठेले और बाइक से इसे सीमा पार कराया जाता है, ताकि कस्टम और सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।
भारत पहुंचते ही यही मक्का होटल, पॉपकॉर्न बनाने वाली यूनिटों और बेसन मिलों तक पहुंच जाता है। 2500 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन है। शादी-ब्याह और त्योहारों के मौसम में पॉपकॉर्न और स्नैक्स की खपत बढ़ते ही इस तस्करी में भी तेज उछाल आ जाता है।
बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि नेपाल को डंपिंग सेंटर बनाकर भारत में तुर्की के मक्के की इस अवैध आपूर्ति ने एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सीमावर्ती इलाकों में अगर सख्त निगरानी नहीं हुई तो यह तस्करी आने वाले समय में और संगठित रूप ले सकती है।
बॉर्डर से जुड़े सूत्रों के मुताबिक नेपाल से भारत पहुंचने के बाद इस मक्के को तस्कर वैध तरीके से गोरखपुर और कानपुर के बाजार में प्रतिदिन कई क्विंंटल मक्का भेजा जाता है, जैसा की पूर्व में तस्करी शुरु होने पर सामने आया था।
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तस्कर इसको नेपाल से 8000 रुपये क्विंटल खरीद कर भारत के व्यापारियों को 10 हजार से 12 हजार रुपये क्विंटल में बेच रहे, जिससे तस्कर मोटी रकम की कमाई कर रहे हैं।
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