भारत-नेपाल की अंतर्राष्ट्रीय सीमा को पहचान देने वाले सीमा स्तंभों को दुुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्तंभों को मजबूत करने के साथ ही रंग-रोगन कर उसका सुंदरीकरण भी हो रहा है।
मंगलवार को दोनों देशों की संयुक्त सीमा सर्वेक्षण टीम ने अलीगढ़वा बॉर्डर के सीमा स्तंभों पर मरम्मत कार्य किया।सीमावर्तीं क्षेत्र में तस्करी व अन्य बढ़ते अपराध के दौरान सीमा की पहचान न होने से सुरक्षा बलों को आ रही दिक्कतों के मद्देनजर दोनों देशों ने वर्षों पुराने सीमा स्तंभों को दुरुस्त करने की रुपरेखा तैयार की थी।
इसके तहत दिसंबर माह में दोनों देशों की संयुक्त टीम ने बॉर्डर क्षेत्र में लगे सीमा स्तंभों का सर्वेक्षण किया। उनकी रिपोर्ट के बाद मरम्मत का कार्य शुरू हुआ है।
कई दिनों से चल रहे मरम्मत कार्य के दौरान मंगलवार को टीम अलीगढ़वा क्षेत्र में पहुंची। यहां दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी में पिलर नंबर 44 को दुरुस्त किया गया।
अफसरों ने बताया कि क्षतिग्रस्त पिलरों को सुधारा जा रहा है, वहीं रंग-रोगन भी जारी है। टीम में भारत के सर्वे अधिकारी अरविन्द्र चंदोला, एसएसबी इंस्पेक्टर गोपाल प्रसाद, हेड कांस्टेबल पूरन सिंह, शिंदे सुनील और नेपाल की ओर से प्राविधिक नायब सूब्बा जनकराज जोशी, इंस्पेक्टर सशस्त्र बल नंदराज राई, एसआई नरायण थापा, हेड कांस्टेबल यादव तिवारी आदि मौजूद रहे।