ट्रक चोरों के गिरोह का गढ़ बना सिद्धार्थनगर, अमेठी, सुल्तानपुर के चोर चढ़े चुके हैं पुलिस के हत्थे
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बाइक और बोलेरो चोरी की बात अब पुरानी हो चुकी है। अब चोरों के निशाने पर ट्रक हैं। बाहर से आकर चोरी करने वाले बदमाश सिद्धार्थनगर को ठिकाना बन चुके हैं। कारण यह कि जनपद नेपाल सीमा से सटा हुआ है। ट्रक चोरी करके महराजगंज में कबाड़ में तब्दील कर देते हैं। इसके बाद पार्ट में नेपाल भेजते हैं। वहां पर जाकर पुराने चेसिस नंबर पर ट्रक खड़ा कर देते हैं। गिरोह पर शिकंजा कसने के लिए पकड़े गए छह आरोपियों पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करके उनकी कमर तोड़ने का प्रयास किया है।
नेपाल बाॅर्डर संदिग्ध गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहता है। सोने, चांदी और आभूषण सहित अन्य सामान की तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब जनपद ट्रक चोरी करने वाले गैंग का गढ़ के रूप में सामने आने लगा है। जनपद से चार ट्रक चोरी हुए हैं। इसमें जोगिया, मोहाना और इटवा थाना क्षेत्र से कारोबारियों के ट्रक चोरी हुए। पुलिस छानबीन में लगी तो पता चला कि यह गिरोह अमेठी का है। चोरी के ट्रक महराजगंज के कारोबारी के यहां कटते हैं।
इस गिरोह में अमेठी के भंगार कारोबारी और अपराधी के अलावा सुल्तानपुर जनपद के अपराधी के शामिल होने के बात सामने आई है। ये पुलिस के हत्थे चढ़े और मौजूदा समय में जेल में बंद हैं। गैंग की कमर तोड़ने के लिए पुलिस गैंगस्टर भी लगा चुकी है लेकिन सीमावर्ती क्षेत्र में बाहर के अपराधियों की धमक बड़ी चुनौती है। अगर गिरोह के लोग यहां से लगातार वारदात को अंजाम तक पहुंचा रहे थे तो इनकी जड़ें गहरी होंगी। इससे अन्य बदमाशों के सक्रिय होने की आशंका है। हालांकि, दावा है कि इस गैंग के छह लोगों को पकड़कर पुलिस गैंग को तोड़ चुकी है।
जनपद की सीमा पार करने के बाद हाईवे पर चढ़ाते हैं वाहन
अबतक हुई जांच में जो सामने आया है, उसमें यह गिरोह जहां से भी वाहन उठाता है, उसे अपने तय स्थान तक पहुंचाने के लिए जनपद की सीमा पार करने तक लिंक रोड का सहारा लेता है। जब जनपद की सीमा पार कर लेते हैं, तब हाईवे पर वाहन को चढ़ाते हैं। ताकि जिले की पुलिस उनकी लोकेशन के बारे में जानकारी न प्राप्त कर सके।
दिन में सड़क के किनारे खड़ा कर देते हैं ट्रक, रात में चलाते हैं
चोरी पकड़ी न जाए, इसके लिए अपने मुकाम तक पहुंचने तक चोरी के ट्रक को रात में ही हाईवे पर चढ़ाते हैं। ऐस इसलिए कि रात में पूछताछ कम होती है। साथ ही अंधेरे में हाईवे पर लगे कैमरे में भी कवर कम होता है। इससे पकड़े जाने की गुंजाइश कम हो जाती है।
नेपाल में मिलता है डेढ़ गुना दाम
पुलिस की पूछताछ में एक अहम बात सामने आई है कि यह गिरोह नेपाल बाॅर्डर को इसलिए ठिकाना बना रहा था कि जो ट्रक नेपाल में चला जाता है, उसकी कोई पूछताछ नहीं होती है। जबकि भारत में ट्रक की हर दूसरे जनपद में जांच होनी तय रहती है। नंबर बदलने के बाद भी पकड़े जाने का डर रहता है। इसलिए चोरों ने ट्रक को नेपाल में खपाना शुरू कर दिया है। यहां महराजगंज के भंगार वाले को सहयोगी बनाए। जहां चंद घंटे में खड़े ट्रक को पार्ट में बदल देते हैं। इसके बाद रात के अंधेरे में ट्राॅली और छोटे पिकअप से उसे बाॅर्डर पार कर देते हैं। जिस चोरी के ट्रक की कीमत 25 लाख रुपये भारत में मिलती। वह नेपाल में पार्ट में पहुंचकर बनकर तैयार होने पर भारतीय रुपये के हिसाब से 35-40 लाख रुपये में बिक जाता है। वहां पर खरीदने वाले तय रहते हैं, जो पुराने ट्रक के चेसिस नंबर पर इसे तैयार करके चलाते हैं। इसलिए यह गिरोह सीमावर्ती क्षेत्र में मजबूत हुआ और ट्रक चोरी करके नेपाल में पहुंचाने लगा।