शहर में पानी सप्लाई के लिए जाता वाहन।
सिद्धार्थनगर। मांग बढ़ने के साथ ही शहर से लेकर गांव तक आरओ प्लांट संचालित हो रहे हैं। मांगलिक कार्यक्रम में अधिक मांग रहती है। लेकिन पीने के पानी की गुणवत्ता में भी खेल हो रहा है।
केवल सहालग के दौरान शुद्ध पानी के आरओ प्लांट का कारोबार करीब 10 करोड़ का है, लेकिन लोगों को मिला पानी कितना शुद्ध है। इसकी गारंटी नहीं है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इसका सुधि लेने वाला भी कोई नहीं है। इसका असर लोगों के सेहत पर पड़ रहा है। जिले में 100 से अधिक आरओ प्लांट संचालित हो रहे हैं।
आरओ पानी के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये का यह कारोबार सहालग के दिन में काफी बढ़ जाता है। वहीं घरों में दूषित पानी आने से सामान्य दिनों के अलावा सहालग में साफ जार का पानी पीने का चलन पहले से काफी बढ़ गया है।
एक अनुमान के अनुसार एक वैवाहिक कार्यक्रम में करीब दो हजार से पांच हजार रुपये पानी वाले लेते हैं। 14 दिसंबर तक सहालग है। इस दौरान शहर में करीब 10 हजार शादियां होंगी। इस तरह करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक स्वच्छ पानी के नाम पर खर्च हो जाएंगे।
आरओ प्लांट की तरफ से आयोजकों को उपलब्ध कराए गए पानी का जार आयोजन समाप्त होने के बाद जार को मैरिज हाल में ही बेतरतीब रख दिया जाता है। उसमें स्वच्छता का ख्याल आदि नहीं रखा जाता है। नियम कानून के पेंच में आरओ प्लांट की जांच भी नहीं हो पाती है। इसके चलते आरओ प्लांट संचालक अपने धंधे को बड़े ही आसानी से संचालित करते हैं।
सूत्रों के अनुसार, शहर में संचालित कई आरओ प्लांट का कोई लाइसेंस ही नहीं है। ्