संवाद न्यूज एजेंसी
घोसियारी। खेसरहा वन रेंज के बन्हैती गांव में वर्षों पुराने आम के पेड़ों की कटान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों आक्रोश जताते हुए आरोप लगाया कि जिन पेड़ों को उद्यान विभाग की रिपोर्ट में ‘’’’बांझ’’’’ (फलहीन) बताया गया। वे हर वर्ष भरपूर आम देने वाले स्वस्थ पेड़ थे।
मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने देखा कि कई विशालकाय आम के पेड़ों को काटकर लट्ठों में बदल दिया गया है। वहीं, हिस्सेदारी के विवाद के चलते कुछ अन्य पेड़ों की कटान फिलहाल रोक दी गई है। बताया जा रहा है कि बाग के मालिक दूसरे गांवों के निवासी हैं और आपसी विवाद के बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया है।
कटान करा रहे पक्ष ने वन विभाग की ओर से जारी सात पेड़ों की परमिट दिखाया। परमिट के अनुसार उद्यान विभाग की संस्तुति के आधार पर पेड़ों को फलहीन मानते हुए कटान की अनुमति दी गई है। हालांकि ग्रामीण जय हिंद, राहुल, साहब अली, सैयद समेत अन्य लोगों का कहना है कि ये सभी पेड़ हर साल अच्छी मात्रा में फल देते थे और उन्हें बांझ बताना वास्तविक स्थिति के विपरीत है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि पेड़ वास्तव में फलदार थे तो उन्हें फलहीन बताने वाली रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई। उनका आरोप है कि पूरे मामले में विभागीय लापरवाही या मिलीभगत की आशंका है और इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर विभागीय अनुमति के नाम पर वर्षों पुराने फलदार और हरे-भरे पेड़ों की कटान की जा रही है। उनका कहना है कि यदि ऐसी घटनाएं जारी रहीं तो हरियाली बचाने के सरकारी दावों पर सवाल उठेंगे।