कमीशनखोरी के फेर में सरकारी एंबुलेंस से मरीजों को निजी अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है। शनिवार की रात ऐसा ही मामला आया, जहां 108 नंबर की एंबुलेंस प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को जिला अस्पताल लाने की बजाय एंबुलेंस चालक सीधे एक निजी नर्सिंग होम में ले गया।
अनुभवहीन चिकित्सक ने जैसे-तैसे प्रसव तो करा दिया, मगर सावधानी न बरतने से जच्चा-बच्चा की हालत बिगड़ गई। बाद में हाथ खड़े करते हुए उसी हालत में उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया।
पीड़ित ने विभागीय अफसरों से इसकी शिकायत की है। शोहरतगढ़ ब्लक के नक्थर गांव निवासी केशराम गुप्ता की पत्नी आरती को शनिवार की रात प्रसव पीड़ा हुई।
दर्द से छटपटाती पत्नी को तत्काल अस्पताल लाने के लिए केशराम ने 108 नंबर की एंबुलेंस को कॉल किया। मौके पर एंबुलेंस पहुंची और मरीज को जिला मुख्यालय तक लाई भी, मगर जिला अस्पताल पहुंचाने की बजाए एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। जहां उसे डिलेवरी के लिए ले जाया गया।
आरोप है कि अनुभवहीन चिकित्सक ने डिलेवरी में सावधानी नहीं बरती। बच्चे के पेट से लगती नली को नहीं काटा गया, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। अस्पताल प्रबंधन के हाथ खड़े करने के बाद आनन-फानन में दोनों को जिला अस्पताल लाया गया, जहां तैनात चिकित्सकों ने उपचार किया।
इस सम्बन्ध में ड्यूटी पर तैनात जिला अस्पताल के चिकित्सक डा.एसएल पटेल के मुताबिक सुबह साढ़े 6 बजे यहां आने पर जच्चा-बच्चा की हालत खराब थी। नली न कटने से ठंड लग गई थी। समय से अस्पताल नहीं लाया गया होता तो दोनों को खतरा बढ़ गया होता। इस संबन्ध में सीएमओ डाॅ. अनीता सिंह ने मामले से अनभिज्ञता जताई। कहा कि इस बारे में पता कर कार्रवाई की जाएगी।