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कपिलवस्तु में घट गए 87 फीसदी विदेशी पर्यटक

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सूना पड़ा कपिलवस्तु स्थित मुख्य स्तूप। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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कपिलवस्तु में घट गए 87 फीसदी विदेशी पर्यटक
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बौद्ध अनुयायियों के मुख्य धार्मिक केंद्र पर दिखा कोरोना वायरस का असर
2020 में महज 4909 विदेशी पर्यटक आए जबकि वर्ष 2019 में यह संख्या 38075 थी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना वायरस के संक्रमण का असर बौद्ध अनुयायियों के मुख्य धार्मिक केंद्र कपिलवस्तु पर भी पड़ा। वर्ष 2019 के मुकाबले 2020 में विदेशी पर्यटकों की संख्या घटकर महज 12.89 प्रतिशत रही। 2019 में जहां 38,075 विदेशी पर्यटक पहुंचे थे, वहीं 2020 में संख्या मात्र 4904 ही रह गई। अप्रैल से दिसंबर 2020 तक पर्यटकों के कदम ही नहीं पड़े।
बीता साल 2020 कोरोना के संक्रमण का शिकार रहा। यह वर्ष सामाजिक, आर्थिक रूप से नुकसान देने वाला साबित हुआ। ऐसे में भगवान बुद्ध की स्थली कपिलवस्तु में भी कोरोना वायरस का खौफ साफ दिखा। नेपाल से सटे इस बौद्ध स्तूप के दर्शन करने बौद्ध बहुल देशों के पर्यटक प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में यहां पहुंचते हैं। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार कपिलवस्तु आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 2020 में 4904 रही। वर्ष 2019 में 38,075 पर्यटक मत्था टेकने पहुंचे थे। पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कोरोना संक्रमण का पहला मामला दिसंबर 2019 में आया था। इसका असर जनवरी 2020 में ही नजर आया। जनवरी 2019 में जहां 6062 पर्यटक आए थे, कोरोना के कारण जनवरी 2020 में इनकी संख्या महज 1060 ही रह गई। 24 मार्च को लॉकडाउन घोषित होने तक मात्र 1141 विदेशी श्रद्धालु आ पाए। अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा पर प्रतिबंध लगने के कारण अप्रैल से दिसंबर 2020 तक एक भी विदेशी पर्यटक नहीं बौद्ध स्तूप के दर्शन करने नहीं पहुंचा।
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कोरोना का असर केवल विदेशी पर्यटकों पर ही नहीं पड़ा बल्कि भारतीय पर्यटकों की आमद में भी 33 फीसदी गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2019 में 18,338 भारतीय पर्यटक पहुंचे थे जबकि 2020 में 12,314 पर्यटक आए। कोरोना संक्रमण के शुुरुआती दौर जनवरी में 1060, फरवरी में 2703, मार्च में 1141 विदेशी पर्यटक आए। 2020 में सिर्फ अप्रैल, मई और जून में ही भारतीय पर्यटकों से सन्नाटा रहा। इसके बाद से साल के अंत तक एक भी पर्यटकों के कदम नहीं पड़े। इस संबंध में जिला पर्यटन सूचना अधिकारी मो. मकबूल ने बताया कि कोरोना वायरस के प्रकोप से वर्ष 2020 में कपिलवस्तु स्थित स्तूप पर आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या काफी कम रही। इनके न पहुंचने से मुख्य स्तूप पर आय का भी नुकसान हुआ है।
स्तूप पर इन देशों से आते हैं पर्यटक
भगवान बुद्ध ने विदेशों के साथ ही उत्तर प्रदेश के कपिलवस्तु समेत श्रावस्ती, सारनाथ में भी ज्ञान दिया। इसके बाद कुशीनगर में अवसान ले लिया। बौद्ध अनुयायियों के लिए काफी महत्व का स्थल है। जिन देशों के पर्यटक जाते आते हैं, उनमें चीन, जापान, थाईलैंड, वर्मा, दक्षिण कोरिया, नेपाल, फ्रांस, वेस्ट जर्मनी, नीदरलैंड, आस्ट्रेलिया आदि प्रमुख हैं। इनमें सर्वाधिक पर्यटक श्रीलंका, जापान और चीन के होते हैं।
पर्यटन विभाग की आय में हुई 85 फीसदी गिरावट
कोरोना महामारी ने स्तूप से पर्यटन विभाग को होने वाली आय में भी 85 फीसदी घटा दी। वर्ष 2019 में स्तूप से पर्यटन विभाग को 11.88 करोड़ रुपये की आय हुई। वर्ष 2020 में यह घट कर 17.78 लाख रुपये ही रह गई। वर्ष 2019 में विदेशी पर्यटकों ने 11.42 करोड़ रुपये के टिकट खरीदे जबकि भारतीय सैलानियों ने महज 4.58 लख रुपये का योगदान दिया। वर्ष 2020 में विदेशी पर्यटकों से मात्र 14.72 लाख रुपये ही कमाई हुई। इस वर्ष भारतीय पर्यटकों ने टिकट के रूप में 3.07 लाख रुपये अदा किए। कपिलवस्तु स्थित मुख्य स्तूप के संरक्षण और देखरेख करने की गरज से भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण ने मई 2019 में टिकट की व्यवस्था कर दी। प्रति विदेशी पर्यटक तीन सौ रुपये और भारतीय के लिए 25 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया। इसके बाद वर्ष 2020 में कोरोना ने दस्तक दे दी। लिहाजा, विदेशी पर्यटक आना बंद कर दिए। क्षेत्रीय अधिकारी अखिलेश तिवारी ने बताया कि कोरोना के कारण आर्थिक नुकसान हुआ है।
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महदेवा सागर को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग
बांसी। बांसी विकास मंच के अध्यक्ष श्रीराम मूर्तिकार ने जिम्मेदार अधिकारियों और राजनीतिक लोगों को पत्र देकर बांसी तहसील क्षेत्र के महादेवा सागर को पर्यटक स्थल घोषित कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि महादेवा सागर की खुदाई के समय अशोक का लाट मिला था जो लखनऊ संग्रहालय में रखा है उसे अपने जिले में वापस मंगाया जाए। साथ ही साथ बांसी नगर क्षेत्र के पटेल नगर वार्ड में स्थित डहर झील को विकसित कर उसे ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया जाए। श्रीराम मूर्तिकार ने यह भी कहा है कि धर्मसिंहवा क्षेत्र के प्राचीन स्तूप को तथा बघौली बाजार के भगवान बुद्ध के पदचिह्न को संरक्षित कराया जाए। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने में सरकार को गंभीर होना चाहिए। जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से ऐतिहासिक धरोहर जमींदोज हो रही हैं। संवाद
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