फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निराश्रितों के लिए नहीं बन सके इज्जत घर

विज्ञापन
विज्ञापन
निराश्रितों के लिए नहीं बन सके इज्जत घर
विज्ञापन

जिले की एक भी ग्राम पंचायत में नहीं बना है सामुदायिक शौचालय
स्वच्छ भारत मिशन के तहत होना था काम, 10 माह पूर्व खुले में शौच मुक्त घोषित हो चुका है जिला
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिले को पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त करने के लिए निराश्रितों के लिए सामुदायिक शौचालय बनाने की योजना थी। लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता की वजह से बन नहीं पाई। सरकार का उद्देश्य था कि ऐसे परिवार जिनके पास शौचालय निर्माण के लिए भूमि नहीं है। उन परिवारों की सुविधा के लिए सामुदायिक शौचालय बनवाया जाए। स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक शौचालय का निर्माण होना था। मगर योजना अब तक जमीन पर नहीं उतर पाई है। जबकि कई लाभार्थी ऐसे हैं जो शौचालय को तो बनवाना चाहते हैं, लेकिन जमीन के अभाव में वह निर्माण नहीं करा पा रहे हैं।
जिले को खुले में शौचमुक्त करने के लिए गांव-गांव सरकार शौचालय बनवा रही है। शौचालय निर्माण के आधार पर जिले को ओडीएफ भी घोषित किया जा चुका है। लेकिन अभी भी कई ऐसे गांव हैं, जहां पर जमीन के अभाव में गरीबों और निराश्रितों के लिए शौचालय नहीं बन सके हैं। इसके अलावा गांव में आने वाले बाहरी, मजदूरों और राहगीरों निराश्रित परिवारों तथा ऐसे परिवार जिनके यहां शौचालय बनवाने के लिए जगह ही नहीं है, उन्हें खुले में शौच जाने से रोकने के लिए शौचालय बनवाए जाने थे। इसके लिए पिछले साल दिसंबर माह में ही स्वच्छ भारत के निदेशक आकाश दीप व प्रदेश के अपर मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी की ओर से पत्र जारी किया गया था उसमें यह बताया गया था कि राहगीरों, श्रमिकों व शौचालय विहीन चुनिंदा परिवारों के खुले में शौच जाने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में गांव ओडीएफ हो पाना मुश्किल होगा। लिहाजा ऐसे गांवों की सूची तैयार कर पूरी रिपोर्ट दी जाए, जिससे कि शौचालय बनवाया जा सके। लेकिन विभाग ने न तो रिपोर्ट देने की जहमत उठाई न ही शौचालय बनवाने की। इसकी वजह से जिले के हजारों परिवार अभी भी खुले में शौच जाने को विवश है।
विज्ञापन

खुले में शौचमुक्त घोषित हो चुका है जिला
जिले में 1199 ग्राम पंचायतें हैं जिसकी आबादी लगभग 27 लाख है। गत वर्ष ही अक्तूबर में जिले को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया है। मगर हालिया स्थिति यह है कि अभी भी अधिकांश परिवारों के पास शौचालय नहीं है। लोग आज भी खुले में शौच के लिए जाने को विवश हैं।
ग्राम पंचायतों को करना था रखरखाव
स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक शौचालय ऐसी जगहों पर बनना है, जहां गांव के कई परिवार हों और उनके पास शौचालय निर्माण के लिए जमीन न हो और श्रमिक व गांव के लोगों का आना-जाना रहता हो। इस योजना के तहत प्रत्येक शौचालय पर दो लाख रुपये तक खर्च करने का नियम है। इसमें 1 लाख 20 हजार रुपये केंद्र सरकार, 60 हजार राज्य और 20 हजार रुपये ग्राम पंचायतों से खर्च करने की योजना है। वहीं ग्राम पंचायतों को रखरखाव की जिम्मेदारी है।
विज्ञापन

भेजा गया था प्रस्ताव
डीपीआरओ अनिल सिंह ने बताया कि शौचालय को लेकर प्रस्ताव भेजा गया था। दो लाख रुपये लागत तय की गई थी, जो सामुदायिक शौचालय बनवाने के लिए पर्याप्त नहीं था। फिर से बैठक कर प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसमें लागत का भी जिक्र किया जाएगा जिससे कि गांव में भी सामुदायिक स्थानों पर शौचालय बन सकें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें