सिद्धार्थनगर। झारखंड और हरियाणा के नूह में बैठकर साइबर ठग लोगों की गाढ़ी कमाई को उड़ा रहे हैं। जिले में हुए साइबर के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यहां एक साल में 70 लाख रुपये से अधिक उड़ा चुके हैं। लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। कारण ठगी करने वालों का लोकेशन ट्रेस होता है, पुलिस जाती है, उससे पहले वह ठिकाना बदल लेते हैं। कई बार तो पता ही गलत निकलता है और पुलिस को उल्टे पांव लौटना पड़ता है।
साइबर अपराध रोकने के लिए बने कानून भी कमजोर है, ऐसा विधि विशेषज्ञ की राय है। उनका कहना है कि जिस अपराध में केस दर्ज किया जाता है, उसमें सजा का प्रावधान बहुत ही कम है। जबकि अपराध की स्थिति को देखते हुए कानून को और सख्त बनाने की जरूरत है।
शिकायत दर्ज कराने में भी परहेज
जिस प्रकार से लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। उस हिसाब से शिकायत करने वाले कम लोग पहुंचते हैं। कुछ मामले में ऐसे हैं, जहां लोग सूचना देकर चुप हो जाते हैं। यह कहते हैं कि शिकायत दर्ज कराएंगे तो लोग जान जाएंगे कि ठगी कि शिकार हुए हैं और निंदा करेंगे। आंकड़ों के मुताबिक ऐसे लोगों की संख्या 50 प्रतिशत है। जिले में एक साल में साइबर ठगी के 76 मुकदमे दर्ज हुए हैं। जिसमें 40 लाख रुपये लोगों के बैंक खाते गए हैं। वहीं, 70 लोग ऐसे हैं, जिनकी का रकम तो गया है, लेकिन मौखिक या फिर फोन के जरिए सूचना दिए। केस दर्ज करवाने के लिए आगे नहीं आए। रिकवरी की बात करें तो साइबर सेल की टीम अबतक लगभग 20 लाख रुपये ठगों से वापस करवाकर पीड़ितों के खाते में भेज चुकी है।
इस प्रकार से लोग कर रहे हैं ठगी
साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक मौजूदा समय में साइबर ठग टेस्ट मैसेज भेज रहे हैं और गलती से खाते में रकम जाने की बात करते हुए वापस करके रुपये उड़ा रहे हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन सामान की डिलिवरी के नाम पर ठग रहे हैं। महिलाओं को घर बैठे रोजगार में देने के नाम पर ठग रहे हैं। इसके साथ ही सबसे बड़ा ठगी का जरिया वीडियो कॉल करके अश्लील वीडियो बना देे रहे हैं और फिर वायरल करने की धमकी देकर रकम ले रहे हैं। इसके साथ ही कई अन्य हथकंडा से ठगी कर रहे हैं।