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-उद्योग विभाग में नहीं है भूमि, दो साल में पूरी नहीं हो सकी 100 एकड़ जमीन की तलाश
इन्वेस्टर्स समिट में हुआ है करीब दस हजार करोड़ रुपये निवेश का अनुबंध
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में उद्योग को धरातल पर उतारने के लिए जमीन ही उपलब्ध नहीं है। बाहर से आए उद्यमियों के सामने पहली चुनौती है कि उद्योग कहां लगाएं। उद्योग विभाग के पास औद्योगिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए जमीन का अभाव है, जबकि उद्यमी चाहते हैं कि एक स्थान पर ही कई उद्योग लगे तो औद्योगिक माहौल कायम होगा।
जिले के स्थापना के तीन दशक बाद भी उद्योग की नींव नहीं पड़ सकी है। इन्वेस्टर्स समिट के बाद 9,986 करोड़ रुपये के निवेश के अनुबंध हुए हैं। उद्यमियों को यहां की अबो हवा पसंद आ रही है, लेकिन उनके सामने भी चुनौती है कि उद्योग कहां लगाएंगे? स्थानीय उद्यमियों के लिए जमीन पाना आसान है और उन्होंने प्रयास भी तेज कर दिया है, लेकिन दक्षिण भारत, उत्तराखंड, लखनऊ, गोरखपुर व आसपास के उद्यमियों के लिए जमीन की तलाश करना कठिन है। दक्षिण भारत के एक उद्यमी ने निवेश सारथी पोर्टल पर सोलर एनर्जी के क्षेत्र में 9,000 करोड़ रुपये निवेश का अनुबंध किया है। उद्योग विभाग के अनुसार वे आने वाले हैं। बाहरी उद्यमी को जमीन व अन्य सुविधाएं मुहैया कराकर यहां औद्योगिक क्षेत्र में क्रांति लाना प्रशासन के लिए भी चुनौती है। इस इकलौते अनुबंध ने जिले के अनुबंध को दस हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंचा दिया, जबकि इसके पहले अनुबंध 986 करोड़ रुपये ही था। जिले में उद्योग की संभावना से विकास की उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों के सामने रोजी रोटी के लिए पलायन करना मजबूरी है।
दो साल में नहीं मिली 100 एकड़ जमीन
उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिकी विकास प्राधिकरण ने जिले में उद्योग बढ़ाने के लिए वर्ष 2022 में 100 एकड़ सरकारी जमीन मांगी थी, जो अब तक नहीं मिल सकी है। एक स्थान पर जमीन मिल जाती तो गोरखपुर के गीडा की तर्ज पर उद्योग लगाने की संभावना बढ़ जाती। शोहरतगढ़ के परसा और डुमरियागंज के रंगरेजपुर में ढाई-ढाई एकड़ जमीन उद्योग विभाग की है, जिसे छोटे उद्यमियों को 99 साल के पट्टे पर आवंटित करने का प्रयास जारी है। उपायुक्त उद्योग दयाशंकर सरोज ने बताया कि रंगरेजपुर और परसा में उद्यमियों को प्लांट आवंटित किए जा रहे हैं। अनुबंध करने वाले उद्यमियों से बात की जा रही है।
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उद्यमियों की बात
दूसरे राज्य से आकर सिद्धार्थनगर में उद्योग लगाने के लिए सबसे पहले जमीन की आवश्यकता है। इसके साथ प्रशासन को शुरुआती दौर में सहयोग का आश्वासन देना होगा। उद्योग का काम 70 प्रतिशत लोन पर आधारित होता है, सहयोग मिलेगा तो काम शुरू करुंगा।
आशीष कुमार पांडेय, हरिद्वार
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सिद्धार्थनगर में हुए इन्वेस्टर्स समिट में मैंने एक करोड़ रुपये निवेश का अनुबंध किया है। प्रशासन से जमीन मांगी है। मार्च में जमीन उपलब्ध हो जाएगी तो अप्रैल में काम शुरू कर दूंगा। बिना प्रशासन के सहयोग के उद्यमियों को जमीन उपलब्ध होने में कठिनाई आएगी।
दाउद अली, कुशीनगर
इन्वेस्टर्स समिट में निवेश का अनुबंध करने वाले सभी उद्यमियों से बात की जा रही है। उद्योग लगाने में जो भी आवश्यकता है, उसे पूरा करने में प्रशासन उद्यमियों का सहयोग करेगा।
संजीव रंजन, जिलाधिकारी