- बाजार में और भी कई तरह के संदिग्ध ब्रांड, भ्रम में ग्राहक, तीन नमूने प्रतिबंधित होने के बाद सामने आया चौथा ब्रांड
- मुरादाबाद की कंपनी की सप्लाई का नमूना सिद्धार्थनगर में फेल, शासन ने लिया संज्ञान
- एजेंसी को दुकानों से 100 प्रतिशत रिकवरी के निर्देश, जिले में पहले भी मिस ब्रांड और मिलावटी घी के मामले आ चुके सामने
- अयोध्या-फैजाबाद और गोरखपुर से बड़े पैमाने पर पैकेट सप्लाई
सिद्धार्थनगर। सेहत बनाए रखने के लिए ब्रांड की ओर भागने वाले लोगों को भी अब सतर्क हो जाने की जरूरत है। तीन माह पहले की जांच में सिद्धार्थनगर और मुजफ्फरनगर सैंपल में कई घातक तत्व पाए जाने के बाद शासन ने मामले को संज्ञान में लिया है। तीन ब्रांड के घी में बड़ी गड़बड़ी की बात सामने आई। इसके बाद कंपनी को सप्लाई बंद करते हुए पूर्व की सप्लाई की दुकानों से रिकवरी के निर्देश दिए हैं। वहीं अब बस्ती में भी दिल्ली डेयरी के ब्रांड का घी का नमूना जांच में फेल हो गया है। इसके साथ ही विभागीय जिम्मेदारों को जांच और निगरानी तेज करने के लिए कहा गया है। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ मिलावट के सेवन से सेहत को बड़ा खतरा बता रहे हैं। ऐसे में अगर शुद्ध मानकर बाजार से खाने और पूजा करने के लिए घी खरीद रहे हैं तो परख कर ही लें। वरना पूजा-व्रत तो प्रभावित होगा ही खाने से सेहत भी बिगड़ सकती है।
जिले में दूध का उत्पादन बहुत कम है। बिक्री करने वाले अधिकांश लोग दूध ही बेच लेते हैं। वहीं, बड़ी आबादी पैकिंग के घी पर निर्भर है, जो विभिन्न ब्रांड के नाम से आता है। बाजार के बारे में जानकारी ली गई तो कुछ स्थानों से अलग-अलग जानकारी सामने आई। ब्रांड के हिसाब से कीमत भी अलग-अलग मिली। नगर के दुकानदार मुकेश मोदनवाल ने बताया कि घी कई ब्रांड और कई पैक का आता है। इसमें 100 ग्राम से पांच किलो, 10 किलो की भी पैकिंग आ रही है। 70 प्रतिशत डिब्बा बंद और पैकेट वाला घी गोरखपुर से आता है। क्योंकि अधिकतर कारोबारी गोरखपुर से ही मंगाते हैं। किराना कारोबारी सुरेश गुप्ता ने बताया कि घी 700, 680, 650 रुपये किलो आता है। इसमें वहां से खरीदते समय ही दाम में अंतर रहता है। इसके मूल्य में कमी उसमें कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर है, लेकिन जानते हुए भी कई ब्रांड का घी रखते हैं। क्योंकि, यहां पर ग्राहक कम मूल्य का मांगते हैं जबकि महंगे वाले घी को लोग कम खरीदते हैं। इसीलिए सस्ती दर वाला लाते हैं, लेकिन बाजार में घी की कमी नहीं है।
वहीं, दूध का कारोबार करने वाले जोगिया क्षेत्र के निवासी झिनकन यादव ने बताया कि दुकान पर अगर खुला घी ले रहे हैं तो मिलावट होनी ही है। क्योंकि, महंगाई बढ़ने के साथ ही मिलावट भी बढ़ गई है। खुले घी में आसानी से डालडा मिल दिया जाता है। कई बार जो हम लोग गांव में बनाकर देते हैं, उस पर लोग संदेह करते हैं और कहते हैं कि डालडा तो नहीं दे दिया। शुद्ध घी जिसके घर पशु है, वही खा सकता है।
भरोसे पर संकट, विक्रेता से भी पूछते हैं मिलावट तो नहीं
गांव में भी घी के गुणवत्ता पर संकट खड़ा है। क्योंकि, आप समझकर खरीद रहे हैं कि 1000 से 1200 रुपये प्रति किलो गांव के पशु पालक से घी खरीद रहे हैं तो सही ही होगा, तो यह सोच आपकी गलत है। मोटी कमाई के लिए पशु पालक भी घी में डालडा की मिलावट करने लगे हैं। भैंस का हो या गाय का। दही से मस्का निकालने के बाद उसे आग पर रखकर तपाया जाता है। एक पशु पालक ने बताया कि यहीं से खेल शुरू होता है। इसमें आग पर रख समय डालडा डाल देते हैं, जिससे वह पूरी तरह से मिल जाता है और पक कर उसी में घुल जाता है। ऐसे में खाने वाले को तनिक एहसास नहीं होता है। एक किलो में 150-200 ग्राम तक डालडा मिलाने का अंतर है। ऐसी गांव से लाकर घी बेचने वाले कुछ लोगों ने जानकारी दी। यानी रुपये देने के बाद असली घी खा रहे हैं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
बलरामपुर और फैजाबाद से लाकर करते हैं बिक्री
नगर में दुकानों के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि ग्रामीण और शहरी इलाके में फैजाबाद और बलरामपुर से घी आता है। इसमें चुनिंदा लोग बाइक और अन्य माध्यम से आते हैं। जो शुद्ध बता कर बिक्री करते हैं। घी और दूध का कारोबार करने वाले लोगों के मुताबिक यह कुछ चौराहों और कस्बे के दुकानदारों को सेट कर रखे हैं, जो उनसे मिलते हैं और 450-500 रुपये किलो में देकर चले जाते हैं। गांव में लोगों को शुद्ध बताते हुए और खुद का पशु पालक बताकर घी देने की पेशकश करते हैं। सेट हुए तो कई लोगों को देकर निकल जाते हैं। यह दूध से मलाई निकाल लेते हैं। इसके बाद वेस्ट में कुछ मिलाकर उसे घी के रूप में बेच देते हैं। इनका पूर्व नेटवर्क है। जानकारों का कहना है कि खुले वाले में मिलावट होने की और आशंका रहती है।
इस प्रकार कर सकते हैं पहचान
पशु पालक रामकुमार यादव ने बताया कि असली और नकली घी पहचान करने के लिए आसान तरीका है। शुद्ध घी हल्का पीला होता है। जो तेल की तरह से दिखता है। ठंड में अगर जम जाता है तो चुटकी में लेने के बाद दरदरा महसूस होता है, जबकि डालडा मिला होता तो पकड़ने पर चिकना लगेगा। साथ ही गर्मी में भी वह गाढ़ा नजर आता है जबकि अगर शुद्ध घी है तो वह डिब्बे में रखने के बाद भी तेल जैसा दिखने के साथ चमकता है। कई साल तक रख दिया जाए तो स्वाद और महक नहीं जाएगी। वहीं, मिलावट है तो स्वाद में अंतर के साथ-साथ गंध भी बदल जाती है।
बोले स्वास्थ्य विशेषज्ञ
मिलावटी कोई भी पदार्थ हो वह शरीर के लिए नुकसानदेह है। खास करके लिवर और किडनी के लिए। इसमें तेल और घी मिलावट वाला है तो चर्बी बढ़ेगी। इससे हार्ट अटैक, ब्रेन स्टोक, लकवा मार सकता है। साथ ही डालडा नियमित खा रहे हैं तो लीवर में चिकनापन आएगा। इससे पेट से जुड़ी कई प्रकार की बीमार होगी। देखते ही देखते गुर्दा खराब हो जाएगा। तेल कोई भी हो उसका कम से कम प्रयोग करें।
डॉ. एसके राव, एमडी मेडिसिन
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बोले जिम्मेदार
घी के सैंपलिंग में तीन ब्रांड में गड़बड़ी होने की बात सामने आई है। शासन की ओर से सप्लाई करने वाली कंपनी को आपूर्ति पूरी तरह से बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। जो आपूर्ति हुई, उसकी बिक्री पर पूरी तरह से रोक लग गई है। कंपनी की ओर से रिकवरी की जाएगी। इसके साथ ही जांच और निरीक्षण किया जाएगा।
- आरएल यादव, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा