- कुशीनगर में खेत में लगी बाड़ में किसानों ने चला रखा था करंट, चली गई तीन युवकों की जान
- जनपद में नीलगाय और छुट्टा पशुओं से फसल बचाने के लिए किसानों किया है यह उपाय
- जिले में बीते साल बाड़ में करंट से युवक की चली गई थी जान, हो चुके हैं कई हादसे
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पशुओं से फसल की रखवाली के लिए किसान खेत में बाड़ लगाकर उसमें करंट चला देते हैं। ताकि झटका लगे और पशु खेत में जाने से डरें, लेकिन पशुओं से फसल को बचाने के लिए लगाई गई बाड़ में चलाया गया करंट आम आदम की जिंदगी के लिए घातक है। उदाहरण के तौर पर कुशीनगर जनपद की घटना, जहां तीन युवकों की खेत की बाड़ में उतरे करंट की चपेट में आने से जान चली गई।
इस प्रकार के हादसे से सिद्धार्थनगर में हो चुके हैं। यहां भी किसानों ने खेतों में बाड़ लगा रखी है, और रात में पशुओं को खेत में जाने से रोकने के लिए करंट चला देते हैं। बीते वर्ष जिले में एक ऐसी ही घटना में किशोर की मौत हो गई। इससे पूर्व में भी घटनाएं घट चुकी हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि अगर खेत की ओर जाते हैं और बाड़ लगी है तो सावधान हो जाएं, नहीं तो हादसे का शिकार हो जाएंगे।
जनपद में बड़े रकबे पर धान और गेहूं की खेती होती है। इसके साथ ही सब्जी भी लगाई जाती है। आठ वर्ष से जिले में छुट्टा पशुओं की तादाद कई गुना बढ़ गई है, जो फसल खा जा रहे हैं। इन पशुओं से फसल बचाने के लिए किसान दिन रात उनकी रखवाली करते हैं। इसके बाद भी रात में पशु फसल खा जाते हैं। कई बार फसल की रखवाली करने वाले किसान छुट्टा पशुओं के हमले का शिकार हो जाते हैं। इन पशुओं से तंग आकर किसान फसलों को कंटीले तार से घेर देते हैं। आबादी से सटे जहां खेत हैं, वहां रात में रखवाली से बचने के लिए उनमें करंट प्रवाहित कर देते हैं। ताकि पशु खेत की ओर आएं और घुसने का प्रयास करें तो झटका लगने के बाद भाग जाएं।
किसानों की यह सोच इर्द- गिर्द रहने वालों की जान पर बन आ रही है। जैसा कुशीनगर में हुआ। यहां खेत में लगी बाड़ में किसान ने करंट चला दिया। जहां एक साथ गए तीन दोस्त उसकी जद में आ गए और उनकी जान चली गई। जनपद में भी इस प्रकार की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में आगाह किया जाता है कि अगर खेत की ओर जा रहे हैं और बाड़ लगी है तो सतर्क हो जाएं। क्योंकि गलती से अगर बाड़ की चपेट में आए तो जान जा सकती है। किसानों को भी ऐसा करने से बचना चाहिए। क्योंकि बाड़ में करंट उतारना अपराध है, उससे किसी की जान जाती है तो यह हत्या जैसा अपराध है। ऐसा विधि विशेषज्ञों की राय है।
-
खेत की घेराई तक ठीक है, लेकिन बाड़ में करंट प्रवाहित करना अपराध है। अगर इससे जनहानि होती है तो संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी।
-उमाशंकर, एडीएम
आबादी से सटे खेतों में अधिक रहता है खतरा
आबादी के पास जो खेत होते हैं, वहां धान के साथ ही सब्जी भी किसान लगाते हैं। यहां पशुओं के जाने की संभावना भी अधिक रहती है। जैसे पशु छुटे या फिर छुट्टा पशु गांव से निकले तो खेत में ही जाते हैं। पशुओं का हमला यहां तेज रहता है। इसलिए किसान बाड़ से घेर देते हैं। रात में खेत में न जाना पड़े इसलिए गांव के पास वाले घर से बिजली का तार लाए और करंट लोहे के तार में उतार दिए। अकसर ऐसा रात में करते हैं। लेकिन होता जान लेवा है। क्योंकि लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं होती है। इसलिए इस प्रकार की घटनाएं होती है।
-
चली गई थी युवक की जान
उसका क्षेत्र में बीते वर्ष एक किशोर रात में खेत की ओर निकला था। यहां मक्के के खेत को बाड़ से घेरा गया था। उसमें पतला लोहे का तार लगाने के साथ ही करंट प्रवाहित कर दिया गया। किशोर ने गलती से हाथ रख दिया, जिससे वह उसकी चपेट में आ गया, एक आवाज निकलने के बाद दोबारा बोल नहीं सका। जब तक लोग पहुंचते उसकी झुलसकर जान जा चुकी थी। इसके अलावा लोटन क्षेत्र में एक महिला करंट लगने से झुलस चुकी है। खेसरहा क्षेत्र में चार पशुओं की चपेट में आने से मौत हो गई थी। यह तो प्रकाश में आने वाली घटनाएं थीं। इसके अलावा भी कई घटनाएं हो जाती हैं, जिसके बारे में पता नहीं चलता है।