सिद्धार्थनगर। बाॅर्डर पर होने वाली शराब की तस्करी को रोकने के लिए आबकारी विभाग अलर्ट मोड पर रहेगा। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर नेपाल से होने वाली शराब की तस्करी को रोकने की कवायद शुरू की है। बढ़नी और अलीगढ़वा में दो अस्थाई चौकी बनाई गई। जहां तीन शिफ्ट में 24 घंटे बाॅर्डर की निगरानी की जाएगी। एक शिफ्ट में चार कांस्टेबल और एक निरीक्षक की ड्यूटी रहेगी। टीम की कार्यों की मॉनिटरिंग सीधे जोन स्तर से की जाएगी। चौकी बना दी गई है, चुनाव आचार संहिता लगते ही सक्रिय हो जाएगी।
जनपद की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगी हुई है। सीमा पूरी तरह से खुली है और बिना रोकटोक के दोनों देश के लोग आते-जाते हैं। मुख्य मार्ग पर हमेशा सुरक्षा एजेंसियां और लोकल थाने की पुलिस अलर्ट मोड में रहती है। जबकि पगडंड़ियों पर आने-जाने वाली गश्त टीम नजर रखती है। लेकिन खुली हुई सीमा का लाभ दोनों देशों से तस्करी करने वाले खूब उठाते हैं। अनाज से लेकर खाद्यान्न और सब्जी। इसके साथ ही आभूषण और नेपाली शराब सहित अन्य प्रकार के मादक पदार्थ की तस्करी करके मोटी कमाई करते हैं।
नेपाली शराब के सस्ता होने के कारण सीमावर्ती क्षेत्र के लोग इसका अधिक प्रयोग करते हैं। क्योंकि वह खुद चले जाते हैं या फिर तस्करों के जरिए उन्हें शराब मिल जाती है। वहीं शादी और चुनाव में लोग सस्ता होने के कारण नेपाली शराब लाकर लोगों को लुभाते हैं। लोकसभा चुनाव होने वाला है। ऐसे में वोटरों को लुभाने के लिए नेपाल शराब की खेप आ सकती है। चुनाव में बाॅर्डर पर होने वाली नेपाली शराब की तस्करी रोकने के लिए आबकारी विभाग की ओर से 68 किलोमीटर सीमा में दो अस्थाई चौकी स्थापित की है। यह चौकी 24 घंटे सक्रिय रहेगी। तीन शिफ्ट में ड्यूटी रहेगी और इंस्पेक्टर की निगरानी में टीम काम करेगी। जोन स्तर पर ड्यूटी टीम की मॉनिटरिंग भी होगी कि किस प्रकार से काम कर रही हैं। माना जा रहा है कि टीम के सक्रिय होने से शराब की तस्करी रूकेगी।
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इसलिए लेकर आते हैं नेपाली शराब
नेपाल में बिकने वाली देसी शराब की कीमत भारत में निर्मित देसी शराब की तुलना में एक पैक पर भारतीय मूल्य से 26 रुपये का अंतर है। जबकि पहले लगभग 40 रुपये का अंतर था। नेपाल से मिली जानकारी के मुताबिक मौजूदा समय में 180 और 200 एमएल वाले पैक की कीमत 28 और 30 रुपये हैं। जबकि भारत में निर्मित 200 एमएल के पाउच की कीमत 54 रुपये निर्धारित है। इस अंतर की वजह से लोग नेपाली शराब लाते हैं।
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कैरियर लाते हैं शराब
बार्डर पर होने वाली शराब की तस्करी में मुख्य व्यक्ति कभी आगे नहीं आता है। वह कैरियर के जरिए सामान इस प्रकार से उस पार भेजने का कार्य करता है। शराब की तस्करी में महिलाएं और 10-15 साल के बच्चों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल करते हैं। वह इसलिए कि सुरक्षा एजेंसियां बच्चों और महिलाओं को कम रोकते हैं। तस्करी में लगे लोगों को प्रति शीशी एक से दो रुपये देते हैं। यह झोले और बोरी में पगडंडी से होकर लाते हैं। एक दिन में कई चक्कर लगा देते हैं। एक स्थान तय होता है, जहां लेकर जाकर एकत्र किया जाता है। इसके बाद तस्कर अपने हिसाब से तय स्थान पर भेजते हैं।
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दुकानों पर भी रहेगी विभाग की नजर
आबकारी विभाग की टीम की लाइसेंस दुकानों पर भी नजर रहेगी। आचार संहिता लगने के बाद एकाएक जिन दुकानों पर बिक्री कई गुना बढ़ गई हो या फिर एकाएक कम हो गई। ऐसे दुकानों को रिकार्ड को खंगाला जाएगा। जहां संदेह होगा, उनसे बिक्री के संबंध में जानकारी ली जाएगी।
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नेपाल बाॅर्डर पर शराब सहित अन्य मादक पदार्थ की तस्करी रोकने के लिए बढऩी और अलीगढ़वा बार्डर पर आबकारी विभाग की ओर से दो अस्थाई चौकी स्थापित की जा रही है। यहां 24 घंटे जवान ड्यूटी करेंगे। लोकसभा चुनाव को देखते हुए विशेष चेकिंग की जाएगी।
-वीर अभिमन्यु सिंह, जिला आबकारी अधिकारी