स्वीमिंग पुल के शेड के लिए लगाई जा रहीं बल्लियां।
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सिद्धार्थनगर। चुनावी समर में पूरी दमदारी से कूदने को बेताब सरकार अपनी उपलब्धियों के पिटारे में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। आचार संहिता से पहले शिलापट्ट लगाने की जल्दी का आलम यह है कि आधी-अधूरी परियोजनाओं के लोकार्पण से भी परहेज नहीं की जा रही। सोमवार को जिले में लोकार्पित परियोजनाओं का हाल ऐसा ही है। जिला स्टेडियम में करीब 8 सालों से निर्माणाधीन स्वीमिंग पूल में अभी महीनों का काम शेष है, मगर इसका लोकार्पण हो गया है।
जिला स्टेडियम में स्वीमिंग पूल का निर्माण पूर्व मंत्री स्व. दिनेश सिंह का ड्रीम प्रोजेक्ट था। वर्ष 2004 में अपने प्रयासों से उन्होंने इस प्रस्ताव को मंजूरी दिलाई, मगर धनराशि वर्ष 2009 में मंजूर हुई। जून 2009 में भूमि अधिग्रहण के बाद 5.02 करोड़ रुपये सितंबर माह से शुरू हुए निर्माण कार्य को वर्षों पहले ही पूरा हो जाना था, लेकिन सरकारी तंत्र की सुस्ती के चलते यह परियोजना अटकी रही। इस बीच इसकी लागत बढ़कर 5.67 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वर्ष 2012 में इसके रिवाइज एस्टीमेट को मंजूरी मिली, मगर काम फिर अटक गया।
अंतत: चुनावी साल में 6.92 करोड़ का एस्टीमेट शुरू कर काम को अंतिम रूप देने का प्रयास तेज हुआ। पहले जून की डेडलाइन तय हुई और फिर सितंबर तक का मौका दिया गया। बावजूद काम पूरा नहीं हुआ तो आचार संहिता की आहट देखते हुए सरकार ने आनन-फानन में लोकार्पण की औपचारिकता पूरी कर दी है। हालांकि स्वीमिंग पूल का निर्माण अभी 80 फीसदी ही पूरा हुआ है। शेड, पूल, पंप, जनरेटर का काम हो चुका है, मगर पूल व कमरों की फिनिशिंग, वायरिंग सहित अन्य काम शेष हैं। इसके बाद इसका ट्रायल होना है। तब कहीं हस्तातंरण की प्रक्रिया होगी।
इस कार्य में अभी एक से डेढ़ माह का समय शेष बताया जा रहा है। बावजूद इसे दरकिनार कर इसका लोकार्पण करते हुए जनता को समर्पित कर दिया गया। इस संबंध में जिला क्रीड़ाधिकारी राजकुमार का कहना है कि स्वीमिंग पूल का ज्यादातर निर्माण पूरा हो चुका है। फिनिशिंग का थोड़ा काम शेष है, जो शीघ्र ही पूरा हो जाएगा।