लोटन में पूर्वांचल बैंक पर हंगामा करते लोग।
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सिद्धार्थनगर। जेबें खाली हैं और समस्याएं हजार हैं। दूर-दूर तक इसका समाधान होता नहीं दिख रहा। बैंकों के पास पैसा नहीं है। शुक्रवार को तीन करोड़ रुपये जिले में आए। विभिन्न बैंकों की 138 शाखाओं में यह राशि पहुंची तो जल्दी ही खत्म हो गई। कुछ घंटों में ही बैंक कैशलेस हो गए। इसके बाद कतारों में खड़े लोगों को निराश लौटा दिया गया। शनिवार और रविवार को छुट्टी के चलते संकट गंभीर होने के आसार बने हुए हैं। बैंक अफसर भी इसे बखूबी स्वीकार कर रहे हैं, मगर व्यवस्था के आगे बेबस हैं।
जिले में विभिन्न बैंकों की कुल 138 शाखाएं हैं। इसमें सर्वाधिक 51 शाखाएं पूर्वांचल बैंक की है। इसमें 48 शाखाएं गुरुवार को बंद रही। नतीजा ग्रामीण क्षेत्रों में हाहाकार की स्थिति रही। तमाम कोशिशों के बाद शुक्रवार की सुबह जैसे-तैसे करेंसी चेस्ट में जिले को तीन करोड़ रुपये मिले। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिकता से यह राशि भेजी गई, मगर यह धन भी नाममात्र का ही शामिल हुआ। पूर्वांचल बैंक की 51 और एसबीआई की 44 शाखाओं में से ज्यादातर की हालत देर शाम तक कैशलेस हो गया था। लंबी कतारों में खड़े ग्राहकों में नकदी के लिए मारामारी मची रही। सबको थोड़ी-थोड़ी राशि देकर लौटाया गया।
बावजूद तमाम ग्राहकों को खाली हाथ ही जाना पड़ा। शुक्रवार को तो फिर भी बैंक खुले होने से लोगों की दुश्वारियां कुछ कम रही, मगर असली परेशानी शनिवार और रविवार की छुट्टी में होनी है। बैंकों में अवकाश के चलते नकदी पाने का कोई विकल्प ग्राहकों के पास नहीं है। ऐसे में उन्हें यहां-वहां भटकना पड़ेगा।