सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज नगर के खीरा मंडी चौराहे पर चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन मंगलवार को हवन पूजन से हुआ। अंतिम दिन कथा व्यास पंडित उत्तम कृष्ण शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चारण से पूजन कराया। राजा परीक्षित की कथा को पूरी करके शुकदेव की विदाई कराकर प्रसंग को विराम दिया। आरती व आचार्यों के सम्मान के पश्चात भंडारा में लोगों प्रसाद वितरण किया गया।
कथा व्यास ने गुरु की महिमा की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जीवन में गुरु का होना आवश्यक है। गुरु हमारे जीवन की दशा और दिशा दोनों को बदलते है लेकिन हमें दुख इस बात का है कि हम गुरु को बहुत मानते हैं, लेकिन गुरु की बातों को नहीं मानते। इसी कारण हम दुखी होते हैं, गुरु मिलने से हमारा नया जन्म होता है। गुरु से मार्गदर्शन और गुरु ही हमारे कष्टों को दूर करता है। कथा व्यास ने कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से भागवत कथा का श्रवण करता है उसका संबंध कृष्ण से अपने आप ही जुड़ जाता है और कृष्ण की कृपा उन पर सदा बनी रहती है और उस व्यक्ति पर कलयुग भी अपना प्रभाव नहीं जमा पाता।
कथा में कृष्ण भगवान की सोलह हजार एक सौ आठ विवाहों का वर्णन किया। शुकदेव की विदाई, व्यास पीठ पूजन के साथ कथा मधुर भजन पर श्रोता आनंदित रहे। जयकारा लगाकर आरती उतारी गई। इसके बाद मंगलवार को हवन पूजन के बाद भंडारे में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इसी के साथ नव दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा समापन हो गया। इस अवसर पर मुख्य यजमान राम करन साहू, शिव बालक गुप्ता, विष्णु प्रसाद, सचिन कुमार, शिवप्रसाद, दिनेश आदि मौजूद रहे।